Allahabad HC ने कहा नाम बदलने का अधिकार मौलिक अधिकार है

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक टिप्पणी करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत किसी व्यक्ति को उसका नाम बदलने से नही रोका जा सकता है। नाम बदलना व्यक्ति की आजादी का हिस्सा है। भारतीय संविधान के आर्टिकल 19(1A) में इसका जिक्र है। 

]हाइकोर्ट के जस्टिस पंकज भाटिया ने रिशु द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीएसई को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता रिशु जायसवाल का नाम बदल कर कबीर जायसवाल के नाम पर नया प्रमाण पत्र जारी करे। क्योंकि याची स्वतंत्रता के तहत अपना नाम परिवर्तित करने का हकदार है।

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याची द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि उसने वर्ष 2011-2013 में सीबीएसई से हाइस्कूल की परीक्षा और 2015 में इंटरमीडिएट की परीक्षा रिशु जायसवाल सुपुत्र संतोष कुमार जायसवाल के नाम पर उत्तीण करी है। जिसके बाद याची ने अपना नाम रिशु से परिवर्तित कर कबीर जायसवाल करने के लिए गजट नोटिफिकेशन कराया। और नोटिस प्रकाशित करवाई और बोर्ड को भी प्राथनापत्र दिया। 

याची का गजट नोटिफिकेशन के जरिये आधार और पैन कार्ड में नाम बदला जा चुका है। लेकिन सीबीएसई ने याची का नाम परिवर्तित करने का प्राथनापत्र यह कहते हुए रद्द कर दिया कि स्कूल के दस्तावेजों में उसका नाम नही बदला है। इसलिए याची ने हाइकोर्ट में सीबीएसई के खिलाफ याचिका दायर की है। 

Case Details:

Title: Kabir Jaiswal vs Union of India & Ors

Case No.: Writ No. 19287 of 2020

Date of Order:02.12.2020

Coram: Hon’ble Justice Pankaj Bhatia

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