कोरोना लॉकडाउन के कारण रद्द शादी का एडवांस ना लौटाना अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस: कंज्यूमर फोरम ने रिसॉर्ट डेवलपर को 2 लाख रुपये रिफंड और 35 हजार मुआवजे का दिया आदेश

दिल्ली के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन के कारण रद्द हुई एक शादी के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। उपभोक्ता फोरम ने एक रिसॉर्ट डेवलपर को आदेश दिया है कि वह ग्राहक को 2 लाख रुपये की एडवांस राशि 7 फीसदी सालाना ब्याज के साथ वापस करे। इसके साथ ही, मानसिक उत्पीड़न और कानूनी खर्च के एवज में 35 हजार रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। फोरम ने स्पष्ट किया कि महामारी के दौरान सरकारी पाबंदियों के कारण समारोह रद्द होना असाधारण परिस्थिति (फॉस मेज्योर) के तहत आता है, इसलिए गैर-रिफंडेबल क्लॉज का हवाला देकर बुकिंग राशि रोकना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) है।

आदेश के मुख्य बिंदु और मुआवजा

फोरम के अध्यक्ष दिव्या ज्योति जयपुरियार और सदस्य हरप्रीत कौर चर्या की पीठ ने 13 जुलाई को यह फैसला सुनाया। पीठ ने क्रिश डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके सिस्टर कंसर्न सिटी पार्क ग्रीन रिसॉर्ट को निर्देश दिया कि वह पीड़ित नरेश कुमार मदान को एडवांस भुगतान की तिथियों से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 2 लाख रुपये की पूरी रकम लौटाए। इसके अलावा, कंपनी को 30 दिनों के भीतर 35,000 रुपये का मुआवजा भी चुकाना होगा।

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क्या है पूरा मामला?

पीड़ित नरेश कुमार मदान ने अपनी बेटी की शादी के लिए 17 जनवरी 2021 को सिटी पार्क ग्रीन रिसॉर्ट की बुकिंग की थी। 22 मई 2021 को तय इस शादी में 350 मेहमानों के शामिल होने की योजना थी और कुल खर्च 10.68 लाख रुपये तय हुआ था। मदान ने एडवांस के तौर पर बुकिंग के दिन 1 लाख रुपये नकद दिए थे और 12 फरवरी 2021 को एनईएफटी (NEFT) के जरिए 1 लाख रुपये का दूसरा भुगतान किया था।

लॉकडाउन की पाबंदियां और घर में शादी

मई 2021 में दिल्ली में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ने पर दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने सख्त पाबंदियां लागू कर दी थीं। इसके तहत बैंकक्वेट हॉल, होटल और रिसॉर्ट में शादियों पर रोक लगा दी गई थी। सिर्फ घर या कोर्ट में अधिकतम 20 लोगों की मौजूदगी में शादी की इजाजत थी। इसके बाद मदान ने 19 मई 2021 को रिसॉर्ट प्रबंधन से संपर्क कर 2 लाख रुपये के रिफंड का अनुरोध किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मजबूरी में परिवार को 22 मई 2021 को घर पर ही बेहद सादगी से शादी संपन्न करानी पड़ी। बार-बार संपर्क करने के बावजूद राशि न मिलने पर मदान ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।

रिसॉर्ट प्रबंधन का पक्ष

शिकायत के जवाब में रिसॉर्ट प्रबंधन ने दलील दी कि 17 जनवरी 2021 के एग्रीमेंट में एडवांस राशि नॉन-रिफंडेबल होने की शर्त साफ दर्ज थी। कंपनी ने नकद भुगतान मिलने से इनकार करते हुए दावा किया कि उसे केवल 1 लाख रुपये एनईएफटी से मिले थे। रिसॉर्ट ने यह भी कहा कि महामारी के दौरान व्यापार ठप रहने और कर्मचारियों को वेतन देते रहने के कारण उसे भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा था।

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उपभोक्ता फोरम की टिप्पणी

आयोग ने रिसॉर्ट की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि महामारी और सरकारी प्रतिबंध एक अनपेक्षित और अपरिहार्य स्थिति (फॉस मेज्योर) थे। ऐसी असाधारण परिस्थितियों को सामान्य अनुबंध की शर्तों के तहत नहीं देखा जा सकता। आयोग ने निर्णय में कहा कि जब कानूनन आयोजन करना ही असंभव हो गया हो, तब कोई भी संस्थान नॉन-रिफंडेबल क्लॉज की आड़ लेकर ग्राहक का पैसा नहीं रख सकता।

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