पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को पंजाब के चीफ सेक्रेटरी KAP सिन्हा से पूछा कि महंगाई भत्ता यानी DA से जुड़े मामले में कथित तौर पर प्रथम दृष्टया गलत बयान देने पर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ ने यह आदेश सिन्हा की मौजूदगी में दिया। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से मिली स्थिति रिपोर्ट में सामने आया कि पंजाब सरकार की अपील अब भी आपत्तियों के साथ लंबित है।
हाईकोर्ट ने पाया कि यह स्थिति सिन्हा के सोमवार के उस बयान से मेल नहीं खाती, जिसमें उन्होंने कहा था कि सभी आपत्तियां दूर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में नई अपील दाखिल कर दी गई है।
कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को प्रस्तावित आपराधिक अवमानना कार्यवाही पर कारण बताने और अगली सुनवाई पर शुक्रवार को व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया है।
कर्मचारियों और पेंशनरों ने लगाया आदेश की अवहेलना का आरोप
मामला पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों की ओर से दाखिल दो आवेदनों पर सुनवाई के दौरान उठा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के 3 अगस्त के फैसले का पालन नहीं किया।
उस फैसले में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि कर्मचारियों और पेंशनरों के सभी लंबित DA की किस्तें दो सप्ताह के भीतर जारी की जाएं। भुगतान की दर केंद्र सरकार द्वारा IAS, IPS और IFS अधिकारियों को दिए जा रहे DA के बराबर रखने को कहा गया था।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब तक सभी बकाया राशि का भुगतान नहीं हो जाता, राज्य सरकार बड़े पैमाने पर प्रिंट और सोशल मीडिया विज्ञापन अभियानों जैसे गैर-उत्पादक खर्च न करे। चीफ सेक्रेटरी को 31 अगस्त तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा गया था।
राज्य सरकार निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं कर सकी और 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की।
हालांकि, करीब एक महीने बाद भी मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से बताई गई आपत्तियों को दूर नहीं किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से मंगाई गई रिपोर्ट
अपील की स्थिति को लेकर याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार के अलग-अलग दावों के बाद हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी।
मंगलवार को पेश रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि अपील अब भी आपत्तियों के साथ लंबित है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने चीफ सेक्रेटरी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की मांग की।
पंजाब सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने याचिकाकर्ताओं पर बेंच चुनने की कोशिश करने का आरोप लगाया और राज्य सरकार की अपीलों में दस्तावेजी प्रक्रिया लंबी होने का हवाला देते हुए सुनवाई स्थगित करने की मांग की।
पीठ ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक टाल दी, लेकिन चीफ सेक्रेटरी के बयान को गंभीरता से लेते हुए उनसे आपराधिक अवमानना की संभावित कार्यवाही पर जवाब मांगा।
विस्तृत आदेश का इंतजार है।

