प्रयागराज महाकुंभ में चर्चा में आए अंतरधार्मिक जोड़े को हाईकोर्ट से राहत, पुलिस कार्रवाई पर रोक

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने एक अंतरधार्मिक जोड़े को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में किसी भी तरह की दंडात्मक या बलपूर्वक पुलिस कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह जोड़ा साल 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान काफी चर्चा में आया था।

जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि खरगोन जिले के महेश्वर थाने में दर्ज एफआईआर (FIR) के संबंध में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ अगली सुनवाई तक कोई भी कठोर कदम न उठाया जाए। हाईकोर्ट ने इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह की तारीख तय की है।

शादी और दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप

दायर याचिका के अनुसार, इस जोड़े का विवाह इस साल 11 मार्च को केरल के एक मंदिर में संपन्न हुआ था। लड़की का दावा है कि उसकी वास्तविक जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 है। इस दावे के समर्थन में उसने अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड, सरकारी पहचान पत्र और महेश्वर नगर पंचायत द्वारा जारी मूल जन्म प्रमाण पत्र का हवाला दिया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि लड़की के परिवार के विरोध के बाद, कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ही महेश्वर नगर पालिका परिषद ने उसका मूल जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिया। जोड़े का कहना है कि लड़की को कानूनन नाबालिग साबित करने के लिए एक साजिश के तहत उसके जन्म संबंधी दस्तावेजों में हेरफेर की गई है।

READ ALSO  हाई कोर्ट ने कहा ट्रायल कोर्ट के जज को फिर से ट्रेनिंग दी जाए- जानिए क्यूँ

दर्ज मुकदमे और अग्रिम जमानत याचिका खारिज

जन्म प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद, महेश्वर थाने में लड़की के पति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) (अपहरण), 81 (शादी का झांसा देकर धोखाधड़ी से विवाह या यौन संबंध), 83 (नाबालिग लड़की को बहलाना-फुसलाना) और 87 (अपहरण या बंदी बनाना) के तहत एफआईआर दर्ज की है।

इसके अलावा, आरोपी पति पर बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 9 (वयस्क पुरुष द्वारा बच्ची से शादी करना) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की विभिन्न धाराएं भी लगाई गई हैं। हाईकोर्ट का रुख करने से पहले, पॉक्सो (POCSO) मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत ने पति की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

सुरक्षा की गुहार और अदालती कार्यवाही

READ ALSO  कांग्रेस सांसद ने वक्फ संशोधन अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, भेदभाव का लगाया आरोप

याचिकाकर्ताओं ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी गहरी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि उनके अंतरधार्मिक विवाह को ‘लव जिहाद’ का नाम देकर सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है, जिससे उनकी जान को सीधा खतरा पैदा हो गया है।

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान पति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा और अधिवक्ता जेरी लोपेज ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) राहुल सेठी और सरकारी वकील सुनीत कपूर ने किया।

READ ALSO  रिसेप्शन शादी का हिस्सा नहीं है; तलाक वहीं दाखिल किया जाना चाहिए जहां शादी हुई हो: बॉम्बे हाई कोर्ट
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles