इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे हत्या के एक दोषी को महज छह साल से भी कम समय में रिहा किए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।
जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने 3 जुलाई को मामले की सुनवाई करते हुए राज्य के प्रमुख सचिव (गृह) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने शीर्ष अधिकारी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि आखिर किस आधार और किन प्रशासनिक मापदंडों के तहत दोषी की समय से पहले रिहाई को मंजूरी दी गई।
यह कानूनी कदम कानपुर नगर जिले के निवासी शैलेंद्र सिंह द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका के बाद उठाया गया है।
रिहाई को चुनौती
याचिका के अनुसार, मुख्य अपराधी जय देव सिंह को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 148 के तहत दोषी ठहराया गया था। अपराध की गंभीरता के कारण उसे आजीवन कारावास की सजा मिली थी, लेकिन इसके बावजूद उसे केवल 5 साल, 10 महीने और 18 दिन की सजा काटने के बाद ही छूट देकर जेल से रिहा कर दिया गया।
इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, हाईकोर्ट की बेंच ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि इतने गंभीर अपराध के लिए उम्रकैद की सजा पाने वाले व्यक्ति को महज साढ़े पांच साल में ही सजा से छूट दे दी गई।
जवाबदेही तय करने के निर्देश
न्याय प्रक्रिया में सभी पक्षों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह रिहा किए गए दोषी को चल रही कानूनी कार्यवाही में सह-प्रतिवादी बनाए और उसे औपचारिक रूप से कानूनी नोटिस जारी करे।
वर्तमान याचिका में उत्तर प्रदेश राज्य और महानिदेशक (जेल एवं प्रशासनिक सुधार) को पहले ही प्रतिवादी के रूप में नामित किया जा चुका है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले की आगे की कार्यवाही टाल दी है और अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।

