इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी की एक फैमिली कोर्ट के जज से स्पष्टीकरण मांगा है, जिन्होंने तलाक के बाद दूसरी शादी कर चुकी एक महिला को उसके पूर्व पति से हर महीने गुजारा भत्ता दिलाने का आदेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में संबंधित महिला को भी औपचारिक नोटिस जारी किया है।
यह निर्देश जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी की पीठ ने 7 जुलाई को महिला के पूर्व पति द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने झांसी फैमिली कोर्ट के एडिशनल प्रिंसिपल जज हरीश चंद्र के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें अपनी पूर्व पत्नी को 10,000 रुपये प्रति माह देने का निर्देश दिया गया था।
जज से मांगा लिखित जवाब
हाईकोर्ट ने झांसी फैमिली कोर्ट के एडिशनल प्रिंसिपल जज हरीश चंद्र को लिखित स्पष्टीकरण दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि जब उन्हें हलफनामे (एफिडेविट) के जरिए महिला की दूसरी शादी की जानकारी दे दी गई थी, तो इसके बावजूद उन्होंने पति को गुजारा भत्ता देने का आदेश क्यों दिया। इस मामले की अगली सुनवाई अब 21 जुलाई को होगी।
क्या है पूरा विवाद
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि झांसी की फैमिली कोर्ट ने 30 जुलाई 2025 को दोनों पक्षों के बीच तलाक की डिक्री मंजूर की थी। हालांकि, पति ने इस तलाक के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, लेकिन इसी बीच डिक्री जारी होने के महज एक महीने बाद ही महिला ने दूसरी शादी कर ली।
पति के वकील ने अदालत को स्पष्ट किया कि महिला के पुनर्विवाह का तथ्य बकायदा एक शपथ पत्र के माध्यम से फैमिली कोर्ट के रिकॉर्ड पर लाया गया था। स्थापित कानूनी प्रावधानों के अनुसार, दूसरी शादी करने के बाद कोई भी महिला अपने पूर्व पति से भरण-पोषण या गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं रह जाती है।
इसके बावजूद, फैमिली कोर्ट ने पति को अपनी पूर्व पत्नी को 10,000 रुपये प्रति माह और उनके बेटे के लिए 5,000 रुपये प्रति माह का भुगतान करने का आदेश जारी कर दिया।

