मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित अरुलमिगु ब्रह्मसिरकंदेश्वर मंदिर की जमीन से समाज सुधारक ई वी रामासामी पेरियार की प्रतिमा हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पाया कि प्रतिमा मंदिर की जमीन पर किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना स्थापित की गई थी।
जस्टिस पी वेलमुरुगन और जस्टिस के के रामकृष्णन की खंडपीठ ने तंजावुर के जिला कलेक्टर को निर्देश दिया कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाकर चार सप्ताह के भीतर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जाए। कोर्ट ने इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने जिला कलेक्टर की स्टेटस रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद यह आदेश दिया। रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि प्रतिमा सरकारी ‘पोरम्बोक’ भूमि पर नहीं, बल्कि मंदिर की जमीन पर स्थापित है।
मंदिर प्रशासन या सक्षम अधिकारी से नहीं ली गई थी अनुमति
हाईकोर्ट ने पाया कि प्रतिमा स्थापित करने के लिए न तो मंदिर प्रशासन से अनुमति ली गई थी और न ही जिला कलेक्टर या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति प्राप्त की गई थी।
इस आधार पर कोर्ट ने जिला कलेक्टर को प्रतिमा सुरक्षित तरीके से हटाने और किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।
खंडपीठ ने रजिस्ट्री को चार सप्ताह बाद मामले को दोबारा सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया, ताकि आदेश के अनुपालन की समीक्षा की जा सके।
याचिका में प्रतिमा हटाने की मांग
यह मामला राम रविकुमार की ओर से दाखिल रिट याचिका पर हाईकोर्ट पहुंचा था। याचिकाकर्ता ने हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR and CE) विभाग के संयुक्त आयुक्त की सिफारिश के आधार पर मंदिर की जमीन से प्रतिमा हटाने का निर्देश देने की मांग की थी।
याचिका में अनुरोध किया गया था कि कोर्ट प्रतिमा हटाने के लिए निश्चित समयसीमा तय करे।
विवादित प्रतिमा तंजावुर जिले के तिरुवैयारु तालुक स्थित कंडियूर गांव में अरुलमिगु ब्रह्मसिरकंदेश्वर मंदिर की परिधि के पास कई दशक पहले स्थापित की गई थी।
ई वी रामासामी (1879–1973), जिन्हें पेरियार के नाम से जाना जाता है, द्रविड़ आंदोलन से जुड़े तर्कवादी और समाज सुधारक थे।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, जिला प्रशासन को चार सप्ताह के भीतर प्रतिमा किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करके कोर्ट को अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी।
