बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोवा में अनुसूचित जनजाति (ST) की अनुमानित आबादी के आंकड़े अधिसूचित करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह मामला राज्य विधानसभा में ST समुदाय के लिए सीटें आरक्षित करने से संबंधित 2025 के कानून की संवैधानिक वैधता से जुड़ा है।
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित एस. जमसांडेकर की खंडपीठ ने गुरुवार को भारत के जनगणना आयुक्त को अनुमानित आबादी की अधिसूचना जारी करने से रोक दिया।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब गोवा में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह ST समुदाय को विधानसभा में आरक्षण दिलाने के प्रयास जारी रखेगी।
आबादी के अनुमान पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने गोवा में अनुसूचित जनजाति की आबादी का अनुमान लगाने के लिए पुराने जनगणना आंकड़ों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए।
खंडपीठ ने 10 सितंबर 2026 को केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय को भेजे गए जनगणना आयुक्त के पत्र का उल्लेख किया। इसमें आयुक्त ने स्वीकार किया था कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर गोवा की वर्तमान कुल आबादी या किसी विशेष वर्ग की आबादी का अनुमान लगाना संभव नहीं है।
इसके बावजूद जनगणना आयुक्त ने 2001 की जनगणना के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि गोवा की कुल आबादी में ST समुदाय की हिस्सेदारी 9.9 प्रतिशत पर बनी रहने का उचित अनुमान लगाया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताया कि जब जनगणना आयुक्त स्वयं आबादी का सही अनुमान लगाने में असमर्थता स्वीकार कर चुके थे, तो उन्होंने समुदाय की आबादी का प्रतिशत अपरिवर्तित रहने की बात किस आधार पर कही।
इसी के मद्देनजर अदालत ने अनुमानित आबादी के आंकड़ों की अधिसूचना जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी।
2025 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती
यह मामला एडविन लुसियो फर्नांडिस की याचिका पर हाईकोर्ट पहुंचा है। उन्होंने ‘रीएडजस्टमेंट ऑफ रिप्रेजेंटेशन ऑफ शेड्यूल्ड ट्राइब्स इन असेंबली कॉन्स्टिट्यूएंसीज ऑफ द स्टेट ऑफ गोवा एक्ट, 2025’ को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी है।
संसद ने अगस्त 2025 में यह कानून पारित किया था, जो अगस्त 2026 में लागू हुआ। इसका उद्देश्य गोवा विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्समायोजन करके ST समुदाय के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था करना है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना पूरी होने तक विधानसभा या लोकसभा चुनावों के लिए आरक्षित सीटों का पुनर्समायोजन नहीं किया जा सकता।
याचिका में कानून की धारा 3(1) को भी चुनौती दी गई है। यह प्रावधान जनगणना आयुक्त को पिछली जनगणना के आधार पर गोवा की अनुमानित ST आबादी निर्धारित करने, राज्य की कुल आबादी में उसका प्रतिशत निकालने और आंकड़ों की अधिसूचना जारी करने का अधिकार देता है।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि एक बार अधिसूचना जारी होने के बाद वह अंतिम मानी जाएगी और उसे किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए केंद्र से अनुरोध करेगी गोवा सरकार
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि उनकी सरकार अनुसूचित जनजाति समुदाय को विधानसभा में आरक्षण दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सावंत ने कहा कि राज्य सरकार लगातार केंद्र के समक्ष यह मामला उठाती रही है। उन्होंने बताया कि संबंधित कानून ST समुदाय के हित में बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालती मामलों के कारण उत्पन्न कानूनी बाधाओं को दूर करने के लिए सरकार गंभीरता से प्रयास करेगी।
सावंत के अनुसार, गोवा सरकार केंद्र से अनुरोध करेगी कि वह राज्य के अनुसूचित जनजाति समुदाय के हितों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करे।
उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार ST समुदाय के हितों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
