सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटाए गए मतदाताओं के दोबारा पंजीकरण के लिए Form 6 के इस्तेमाल से जुड़े विवाद पर सुनवाई करने का फैसला किया है। कोर्ट ने बुधवार को कहा कि यह मामला अभी उसके विचाराधीन है और प्रभावित मतदाताओं को किसी तरह की आशंका रखने की जरूरत नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण को चुनाव आयोग के हालिया स्पष्टीकरण के संबंध में औपचारिक आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर कोर्ट चुनाव आयोग को संबंधित समयसीमा बढ़ाने का निर्देश दे सकता है।
पहले से पंजीकृत मतदाताओं के लिए Form 6 के इस्तेमाल पर विवाद
सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने चुनाव आयोग की ओर से मंगलवार को जारी स्पष्टीकरण पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आयोग ने 28 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों को ध्यान में नहीं रखा।
भूषण के अनुसार, विवाद उन मतदाताओं से जुड़ा है जिनके नाम मई-जून 2026 तक मतदाता सूची में दर्ज थे, लेकिन SIR के दौरान उन्हें ड्राफ्ट सूची से बाहर कर दिया गया।
उन्होंने दलील दी कि ऐसे लोगों से Form 6 भरवाना उचित नहीं है, क्योंकि इसका इस्तेमाल पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए किया जाता है।
भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस प्रक्रिया की विसंगति की ओर ध्यान दिलाया था। इसके बावजूद चुनाव आयोग ने अपने नए स्पष्टीकरण में पहले से पंजीकृत मतदाताओं के लिए भी Form 6 की आवश्यकता दोहराई है।
31.59 लाख स्थानांतरित मतदाताओं के लिए Form 8 का मुद्दा
प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि SIR के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट (ASDD) श्रेणी में शामिल मतदाताओं के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाने पर पहले चर्चा हुई थी।
उनके अनुसार, 28 अक्टूबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि ASDD सूची में स्थानांतरित श्रेणी के 31.59 लाख मतदाताओं को Form 8 भरने का विकल्प दिया जाना चाहिए।
इसी तरह अनुपस्थित या पता नहीं चल पाने वाले 11.73 लाख मतदाताओं को निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी अपने Enumeration Forms जमा करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
भूषण ने कहा कि कोर्ट ने चुनाव आयोग से ASDD सूची में शामिल लगभग 47 लाख लोगों तक पहुंचने और उनकी सहायता करने को भी कहा था।
इसके तहत आयोग को बूथ और ब्लॉक स्तर पर ASDD सूची हिंदी में उपलब्ध कराने तथा मतदाताओं को Enumeration Form या Form 8 भरने में मदद करने की बात कही गई थी।
उन्होंने यह भी बताया कि कोर्ट ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने को कहा था।
भूषण का आरोप था कि आयोग के नए स्पष्टीकरण में इन बातों को शामिल नहीं किया गया।
चुनाव आयोग ने आपराधिक कार्रवाई को लेकर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने मंगलवार को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम पहले की मतदाता सूची में था और वह SIR के दौरान या उसके बाद Form 6 जमा करता है, तो केवल इसी आधार पर उसके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती।
आयोग के अनुसार, यह स्थिति तब लागू होगी जब संबंधित व्यक्ति किसी अन्य लोकसभा या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत न हो और उसने कानून के तहत आवश्यक घोषणा की हो।
यह स्पष्टीकरण उन आशंकाओं के बीच जारी किया गया था जिनमें कहा जा रहा था कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को Form 6 भरने पर आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
दरअसल, Form 6 में आवेदक को पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने से संबंधित घोषणा करनी होती है।
प्रशांत भूषण ने कहा, केवल अभियोजन से राहत पर्याप्त नहीं
भूषण ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग की ओर से आपराधिक कार्रवाई न किए जाने का आश्वासन मूल विवाद का समाधान नहीं करता।
उनका कहना था कि जिन लोगों के नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज थे और केवल Enumeration Form जमा नहीं करने के कारण ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए, उन्हें पहली बार पंजीकरण कराने वाला मतदाता नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि आयोग का स्पष्टीकरण इस प्रक्रियागत विसंगति को दूर करने के बजाय Form 6 के इस्तेमाल पर कायम है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार की सुनवाई में इस विवाद पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया। पीठ ने प्रशांत भूषण को आवेदन दाखिल करने की अनुमति देते हुए मामले को 19 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
