कर्नाटक हाईकोर्ट ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के कथित भर्ती घोटाले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) को अब तक सक्रिय नहीं किए जाने पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने सरकार को तत्काल आवश्यक कदम उठाने और अपराध जांच विभाग (CID) से जांच के रिकॉर्ड SIT को सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 अक्टूबर को SIT जांच बरकरार रखे जाने के बावजूद मामले में अब तक प्रगति क्यों नहीं हुई।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि SIT के दो सदस्यों को बदलने को लेकर चल रही प्रक्रिया के कारण जांच नहीं रोकी जा सकती। सरकार SIT को पुलिस स्टेशन के रूप में अधिसूचित कर सकती है और नामित पुलिस अधीक्षक (SP) को CID से जांच के रिकॉर्ड प्राप्त करने का अधिकार दे सकती है।
अदालत ने सरकार को शुक्रवार तक आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही स्पष्ट किया कि SIT को पुलिस स्टेशन के रूप में अधिसूचित नहीं किए जाने पर उचित आदेश पारित किए जाएंगे।
SIT जांच शुरू करने में देरी पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागप्रसन्ना ने महाधिवक्ता के. शशि किरण शेट्टी से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने जांच आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
महाधिवक्ता ने स्वीकार किया कि सरकार ने अभी तक SIT को पुलिस स्टेशन के रूप में अधिसूचित नहीं किया है और न ही CID से जांच के रिकॉर्ड स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि इतने गंभीर आरोपों वाले मामले में सरकार को लापरवाह रवैया नहीं अपनाना चाहिए और जांच से संबंधित कार्रवाई तेजी से पूरी करनी चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने SIT के गठन में हस्तक्षेप नहीं किया है। केवल दो सदस्यों, जिनमें जांच दल का प्रमुख भी शामिल है, के स्थान पर दूसरे अधिकारियों के नाम प्रस्तावित करने की अनुमति दी गई है।
हाईकोर्ट के अनुसार, SIT प्रमुख की नियुक्ति और जांच दल को सक्रिय करना दो अलग-अलग विषय हैं। सरकार प्रमुख की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय होने से पहले भी जांच आगे बढ़ाने की व्यवस्था कर सकती है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की उन टिप्पणियों का भी उल्लेख किया, जिनमें आरोपों की गंभीरता और सरकारी पदाधिकारियों की संभावित संलिप्तता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम से जांच आवश्यक मानी गई थी।
SIT के नए सदस्यों के नामों पर आपत्ति दर्ज करने के लिए दो दिन
महाधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार SIT के दो सदस्यों के स्थान पर प्रस्तावित अधिकारियों की सूची सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट को सौंपी।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 25 अक्टूबर के पत्र में शामिल प्रस्तावित नामों की जानकारी याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराए, ताकि वे अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकें।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज और अधिवक्ता वेंकटेश दलवाई पेश हुए। हाईकोर्ट ने उन्हें आपत्तियां दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रस्तावित सूची में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) से नीचे के रैंक वाले अधिकारियों के नाम शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए।
अधिकारियों की वरिष्ठता और पात्रता पर चर्चा के बाद महाधिवक्ता ने पुलिस महानिरीक्षक (IGP) रैंक के अधिकारियों वाली सूची के हिस्से को आगे नहीं बढ़ाने पर सहमति जताई।
हाईकोर्ट ने कहा कि SIT की अंतिम संरचना पर अगली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर विचार करने के बाद निर्णय लिया जाएगा।
KPSC भर्ती घोटाले में आयोग के अध्यक्ष समेत कई गिरफ्तार
यह मामला कर्नाटक लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
मामले में KPSC के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार, आयोग की सदस्य बी.वी. गीता, पूर्व परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और बिचौलिए बसवराज कन्नाले को गिरफ्तार किया जा चुका है।
साहूकार पर अपनी बेटियों का औद्योगिक अधिकारी के पद पर अवैध तरीके से चयन कराने का आरोप है। इसके अलावा पशु चिकित्सकों की भर्ती में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
साहूकार को निलंबित किया जा चुका है, जबकि राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति दे दी है।
हाईकोर्ट ने इन आरोपों की जांच के लिए SIT का गठन किया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मामले की समानांतर जांच कर रहा है।
अब मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी। इस दौरान हाईकोर्ट SIT को सक्रिय करने संबंधी सरकारी कार्रवाई और जांच दल की प्रस्तावित संरचना पर दाखिल आपत्तियों की समीक्षा करेगा।
