इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में वर्ष 2020 से खातों का ऑडिट नहीं कराए जाने पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह बताए कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार विश्वविद्यालय के अधिकारियों, जिनमें पूर्व कुलपति भी शामिल हैं, के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने 27 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि पांच वर्षों तक विश्वविद्यालय के खातों का ऑडिट नहीं होना बेहद गंभीर मामला है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि राज्य सरकार ने इस दौरान वित्तीय जांच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए।
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव अपनी ओर से प्रधान सचिव से कम रैंक के अधिकारी को भी हलफनामा दाखिल करने के लिए नामित कर सकते हैं।
सरकार की निष्क्रियता पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
यह मामला एक जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया, जब कोर्ट को बताया गया कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के खातों का वर्ष 2020 से ऑडिट नहीं हुआ है।
हाईकोर्ट ने पूछा कि राज्य सरकार ने इतने लंबे समय तक नियमित ऑडिट या विशेष ऑडिट कराने की पहल क्यों नहीं की।
कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करने पर राज्य सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए था। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन इसके बावजूद आवश्यक कार्रवाई नहीं करता, तो कुलपति सहित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाए जाने चाहिए थे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को सरकारी अनुदान और सार्वजनिक धन मिलता है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के लिए हो और उसका दुरुपयोग न किया जाए।
विश्वविद्यालयों में ईमानदारी और पारदर्शिता जरूरी
शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय देश के भविष्य का निर्माण करते हैं। इसलिए उनका संचालन पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान सभ्यता की आधारशिला हैं और उन छात्रों से जुड़े हैं, जो इस देश का भविष्य हैं। ऐसे संस्थानों का संचालन त्रुटिहीन ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ किया जाना आवश्यक है।”
न्यायालय ने कहा कि विश्वविद्यालयों के कुलपति और रजिस्ट्रार की कानूनी जिम्मेदारी है कि संस्थान का संचालन उचित तरीके से हो और जनता का उन पर विश्वास बना रहे।
कोर्ट ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में पिछले पांच वर्षों से ऑडिट नहीं होने की स्थिति को अत्यंत खेदजनक बताया।
नए कुलपति ने फरवरी में की थी फॉरेंसिक ऑडिट की मांग
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति ने 11 फरवरी 2026 को राज्य सरकार को पत्र लिखकर खातों का व्यापक ऑडिट कराने का अनुरोध किया था। इसमें फॉरेंसिक ऑडिट भी शामिल था।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि ऑडिट की प्रक्रिया चल रही है।
विश्वविद्यालय की ओर से पेश वकील ने भी स्वीकार किया कि संस्थान के खातों का हर साल ऑडिट होना चाहिए।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का ब्योरा मांगा
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि पिछले पांच वर्षों में ऑडिट नहीं कराने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं।
सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि वर्ष 2020 से विश्वविद्यालय का नियमित या विशेष ऑडिट क्यों नहीं कराया गया।
इसके अलावा, कोर्ट ने उन प्रक्रियाओं की जानकारी मांगी है, जिनके तहत अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करने वाले विश्वविद्यालय अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।
हाईकोर्ट ने सरकार को वर्ष 2020 से विश्वविद्यालय के ऑडिट के संबंध में जारी आदेश भी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक आवश्यक जानकारी हलफनामे के माध्यम से दाखिल नहीं की गई, तो उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।
