पश्चिम बंगाल चुनाव: अधिकारियों के तबादले में हस्तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, चुनाव आयोग का फैसला बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण के चुनाव आयोग (EC) के अधिकार को चुनौती दी गई थी। याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि इस मामले में उठाए गए ‘कानूनी सवाल’ (Question of Law) भविष्य की चर्चा के लिए खुले रहेंगे।

यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के 31 मार्च के उस आदेश के खिलाफ अपील के रूप में शीर्ष अदालत पहुंचा था, जिसमें हाईकोर्ट ने अधिकारियों के तबादले को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चुनाव आयोग द्वारा व्यापक स्तर पर अधिकारियों का फेरबदल करना राज्य की प्रशासनिक स्वायत्तता में हस्तक्षेप है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिससे चुनाव आयोग द्वारा किए गए तबादले प्रभावी रहेंगे।

अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग की शक्तियों की सीमा से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विस्तृत विचार किसी अन्य मामले या भविष्य में किया जा सकता है। इस निर्णय से चुनाव प्रक्रिया के दौरान आयोग के प्रशासनिक नियंत्रण पर चल रही कानूनी बहस अभी समाप्त नहीं हुई है।

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है और यह फैसला चुनाव की तैयारियों के बीच आया है। राज्य में विधानसभा चुनाव दो चरणों में—23 अप्रैल और 29 अप्रैल—को संपन्न होंगे। इसके बाद 4 मई को मतों की गिनती की जाएगी और परिणामों की घोषणा होगी।

READ ALSO  गृहिणी पत्नी के नाम पर हिंदू पति द्वारा खरीदी गई संपत्ति परिवार की संपत्ति होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

आमतौर पर चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने और स्थानीय प्रशासन या पुलिस के किसी भी संभावित पक्षपात को रोकने के लिए आदर्श आचार संहिता के तहत अधिकारियों के तबादले करता है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles