असम में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में गौहाटी हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने साफ किया है कि जब तक ‘वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (WII) अपनी विस्तृत पारिस्थितिक प्रभाव रिपोर्ट (Ecological Impact Study) नहीं सौंप देता, तब तक 5,730 करोड़ रुपये की गुवाहाटी रिंग रोड परियोजना के लिए आमचांग वन्यजीव अभयारण्य (Amchang Wildlife Sanctuary) के भीतर न तो पेड़ों की कटाई होगी और न ही कोई निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अभयारण्य और उसके संवेदनशील हाथी कॉरिडोर (Elephant Corridor) को किसी भी तरह के नुकसान से बचाना बेहद जरूरी है।
‘राजधानी के फेफड़ों’ को बचाने की मुहिम
यह पूरा मामला स्थानीय नागरिकों अर्कशीश चालिहा और महेश डेका द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) के बाद सामने आया। याचिकाकर्ताओं ने इस मेगा-हाईवे परियोजना के कारण आमचांग वन्यजीव अभयारण्य को होने वाले खतरे पर गहरी चिंता जताई थी, जिसे गुवाहाटी शहर के लिए ‘फेफड़ों’ के समान माना जाता है।
यह विवाद इस साल फरवरी में तब गहरा गया जब गुवाहाटी वन्यजीव प्रभाग ने सड़क चौड़ीकरण के लिए अभयारण्य के भीतर पेड़ों को काटने के लिए एक ई-टेंडर जारी किया था। लगभग 65.15 लाख रुपये की लागत वाले इस टेंडर में पेड़ों की कटाई के लिए 90 दिनों की समय-सीमा तय की गई थी।
हालांकि, राज्य सरकार ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि यह ई-टेंडर केवल अग्रिम रूप से ठेकेदार का चयन करने के लिए था, न कि प्रभाव अध्ययन (Impact Assessment) से पहले तुरंत कटाई शुरू करने के लिए।
कोर्ट की सख्त शर्तें और फंडिंग की गारंटी
यद्यपि ‘नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ’ की स्थायी समिति ने इस परियोजना को सशर्त मंजूरी दे दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने अब इन शर्तों को कानूनी रूप से बाध्यकारी बना दिया है। अदालत ने निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- अध्ययन से पहले कोई कटाई नहीं: सरकारी वकील ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि जब तक WII की रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक अभयारण्य के संवेदनशील क्षेत्र में एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा।
- निर्माण के सख्त नियम: वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रात के समय निर्माण कार्य पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा और सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।
- 90 दिनों में रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य: WII को परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) मिल चुकी है। संस्थान दो सप्ताह के भीतर अपना तकनीकी और वित्तीय प्रस्ताव तैयार करेगा। इसके बाद, फंड मिलने के 90 दिनों के भीतर फाइनल रिपोर्ट सौंपनी होगी।
- NHAI देगा फंड: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कोर्ट को भरोसा दिया है कि इस पर्यावरण अध्ययन के लिए जरूरी फंड तुरंत जारी कर दिया जाएगा।
इन पुख्ता आश्वासनों के बाद हाई कोर्ट ने इस जनहित याचिका को बंद कर दिया। अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता खुद इस रिंग रोड के विरोध में नहीं हैं, क्योंकि वे भी मानते हैं कि शहर में ट्रैफिक सुधार के लिए बाईपास सड़क बेहद जरूरी है, बशर्ते पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
क्या है 5,730 करोड़ रुपये का गुवाहाटी रिंग रोड प्रोजेक्ट?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल सितंबर में इस 121.43 किलोमीटर लंबे गुवाहाटी रिंग रोड की आधारशिला रखी थी। इसका मुख्य उद्देश्य असम की राजधानी गुवाहाटी को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाना और पश्चिम बंगाल व बिहार जैसे राज्यों से आने वाले भारी वाहनों व ट्रकों को सुगम रास्ता देना है।
इस विशाल परियोजना को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है:
- सड़क निर्माण: 4,530 करोड़ रुपये
- ब्रह्मपुत्र नदी पर पुल: दक्षिणी तट पर नरेंगी को उत्तरी तट पर कुरुवा से जोड़ने वाले 2.9 किलोमीटर लंबे पुल के लिए 1,200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
तीन चरणों में बंटा है प्रोजेक्ट का नक्शा:
- पहला चरण (55 किमी): यह हिस्सा कुरुवा और चंद्रपुर होते हुए बैहाटा चरियाली को सोनापुर से जोड़ेगा। इसमें चार लेन की मुख्य सड़क के साथ-साथ ब्रह्मपुत्र पर छह लेन का पुल, पांच अन्य पुल, तीन फ्लाईओवर और तीन रेलवे ओवरब्रिज शामिल हैं।
- दूसरा चरण: राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (NH-27) पर जयनगर अंडरपास से जोराबाट तक के मौजूदा चार लेन के हिस्से को छह लेन में बदला जाएगा, जिसमें दो नए फ्लाईओवर भी बनेंगे।
- तीसरा चरण: बैहाटा चरियाली से सोनापुर तक NH-27 पर पहले से बने चार और छह लेन के हाईवे को अपग्रेड किया जाएगा।
हाई कोर्ट को उम्मीद है कि WII के वैज्ञानिक सुझावों को शामिल कर असम की समृद्ध जैव विविधता को बचाते हुए इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का निर्माण पूरा किया जा सकेगा।

