लखीमपुर खीरी हिंसा: गवाहों को धमकाने के आरोपों से अजय और आशीष मिश्रा मुक्त, सुप्रीम कोर्ट को यूपी पुलिस ने दी क्लीन चिट

सुप्रीम कोर्ट को उत्तर प्रदेश पुलिस ने सूचित किया है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष मिश्रा लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के गवाहों को डराने-धमकाने के आरोपों में शामिल नहीं थे। पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में इन दोनों का नाम शामिल नहीं है। इसके साथ ही अदालत को यह भी बताया गया कि मुख्य हत्या मामले का मुकदमा अगले तीन महीनों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान मामले की प्रगति रिपोर्ट पर विचार किया। पीठ ने आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर सुनवाई अगले महीने तक के लिए टाल दी है, ताकि तब तक मुकदमे की आगे की स्थिति पर नजर रखी जा सके।

गवाहों को धमकाने के मामले की जांच पूरी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गवाहों को कथित तौर पर परेशान करने के मामले की अलग से चल रही जांच अब पूरी हो चुकी है। इस मामले में अमनदीप सिंह नाम के एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, जिस पर मजिस्ट्रेट ने संज्ञान भी ले लिया है।

आशीष मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत में दलील दी कि इस ताजा रिपोर्ट से उनके मुवक्किल पूरी तरह दोषमुक्त साबित होते हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और मिश्रा परिवार पर कोई आरोप नहीं पाया गया है, इसलिए यदि किसी को इस पर कोई आपत्ति है तो वह सुप्रीम कोर्ट के बजाय स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। उन्होंने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में लंबित रखने की आवश्यकता पर सवाल उठाया।

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मुख्य मुकदमे की मौजूदा स्थिति

मुख्य मुकदमे की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए पीठ को बताया गया कि अब केवल 62 गवाहों के बयान दर्ज होना शेष है। सिद्धार्थ दवे ने अदालत को आश्वस्त किया कि बाकी बची गवाहियों को लगभग तीन महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

इससे पहले इसी साल 8 मई को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की धीमी गति पर नाखुशी जाहिर की थी। कोर्ट ने पाया था कि लगातार दो महीनों तक किसी भी गवाह का परीक्षण नहीं किया गया था। इसके बाद शीर्ष अदालत ने ट्रायल जज को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और समयबद्ध तरीके से सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था। साथ ही यूपी सरकार को नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट पेश करने के लिए भी कहा गया था।

लखीमपुर खीरी हिंसा की पृष्ठभूमि

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यह पूरा मामला 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में हुई हिंसक झड़प से जुड़ा है। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के विरोध में वहां किसान प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके दौरान भारी अशांति फैल गई थी।

इस घटना में एक एसयूवी वाहन से कुचलकर चार किसानों की मौत हो गई थी। इसके बाद भड़की हिंसा में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर एक ड्राइवर और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस पूरे घटनाक्रम में एक स्थानीय पत्रकार की भी मौत हो गई थी। दिसंबर 2023 में निचली अदालत ने मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा और 12 अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या तथा आपराधिक साजिश सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए थे, जिसके बाद इस मुख्य मुकदमे की सुनवाई औपचारिक रूप से शुरू हुई।

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