धार्मिक यात्रा में अव्यवस्था पर IRCTC पर जुर्माना, केरल उपभोक्ता आयोग ने 33 हजार रुपये भुगतान का दिया आदेश

केरल के एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने धार्मिक टूर पैकेज के संचालन में भारी देरी, अव्यवस्था और तय गंतव्यों में कटौती के मामले में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने पीड़ित महिला यात्री को मानसिक उत्पीड़न और वित्तीय नुकसान के एवज में 30,000 रुपये का मुआवजा और 3,000 रुपये अदालती खर्च के रूप में भुगतान करने का निर्देश दिया है।

17 घंटे की देरी और अचानक बदला स्टेशन

अध्यक्ष पी. वी. जयाराजन, सदस्य प्रीथा जी. नायर और विजू वी. आर. की पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया। यह विवाद पुरी, काशी, अयोध्या और प्रयागराज संगम की तीर्थयात्रा के लिए बुक कराए गए एक पैकेज टूर से जुड़ा है। तय कार्यक्रम के अनुसार यह यात्रा 10 दिसंबर 2022 को तिरुवनंतपुरम के कोचुवेली रेलवे स्टेशन से शुरू होनी थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार, IRCTC ने अंतिम समय में बोर्डिंग स्टेशन बदलकर एर्नाकुलम कर दिया। इस वजह से महिला और उनके पति को खुद के खर्च पर टैक्सी लेकर एर्नाकुलम पहुंचना पड़ा। इसके अलावा, जिस ट्रेन से यात्रा होनी थी, वह अपने निर्धारित समय से लगभग 17 घंटे की देरी से 11 दिसंबर की तड़के करीब 2 बजे रवाना हुई।

सुविधाओं का अभाव और अनुष्ठानों से वंचित यात्री

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट कोयला घोटाला प्रकरण में ट्रायल जज का नाम तय करेगा

लंबी देरी के कारण टूर आयोजकों ने कई तय धार्मिक स्थलों के दौरे रद्द कर दिए या वहां ठहरने की अवधि घटा दी। इससे यात्री अपने महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान पूरे करने से वंचित रह गए। इसके अतिरिक्त, शिकायत में ठहरने के लिए घटिया होटल देने, अस्वास्थ्यकर भोजन परोसने और पूरी यात्रा के दौरान उचित मार्गदर्शन न मिलने के आरोप भी लगाए गए।

IRCTC की दलीलें आयोग ने कीं खारिज

मामले की सुनवाई के दौरान IRCTC ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि रेलवे के परिचालन संबंधी कारणों से बोर्डिंग स्टेशन बदलना पड़ा था, जिसकी जानकारी यात्रियों को पहले ही दे दी गई थी। सार्वजनिक क्षेत्र के इस उपक्रम ने दावा किया कि कोचुवेली से एर्नाकुलम के बीच का किराया लौटाने का विकल्प दिया गया था, देरी के दौरान प्रतीक्षा गृह और भोजन मुहैया कराया गया था तथा ट्रेन में देरी चक्रवात एवं परिचालन संबंधी मजबूरियों के कारण हुई थी।

हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने IRCTC के तर्कों को अमान्य कर दिया। आयोग ने टिप्पणी की कि संस्था अपनी कमियों को नकारने के बजाय परिस्थितियों का हवाला देकर यात्रियों को हुई परेशानियों को सही ठहराने का प्रयास कर रही थी।

READ ALSO  कानून को हाथ में लेकर किसी की निजता और स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट ने दी लिव-इन विधवा और विधुर जोड़े को सुरक्षा

आयोजकों की जवाबदेही तय

अपने आदेश में आयोग ने स्पष्ट किया कि IRCTC के खुद के लिखित जवाब से यह साबित होता है कि यात्रियों को पूरी यात्रा के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आयोग ने जोर देकर कहा कि पैकेज टूर आयोजित करने वाली एजेंसियां परिचालन समस्याओं का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं। तय कार्यक्रम के अनुसार सुविधाएं और सेवाएं प्रदान करना आयोजक की प्राथमिक जिम्मेदारी है। आयोग ने IRCTC को आदेश प्राप्ति के एक महीने के भीतर पूरी राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

READ ALSO  मरने से पहले दिए गए बयानों में विरोधाभास होने पर प्रथम बयान को अधिक विश्वसनीय और भरोसेमंद मानना होगा: सुप्रीम कोर्ट
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles