परीक्षा से दूर रखना न्याय के विरूद्ध: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली- सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवा के पांच अभ्यर्थियों को विशेष मामले के तहत साक्षात्कार देने की अनुमति दे दी है।

कोर्ट ने कहा इन उम्मीदवारो को संघ लोक सेवा आयोग(यूपीएससी) की परीक्षा से दूर रखना न्याय के विरुद्ध होगा,क्योंकि कोरोना के चलते विश्वविद्यालय द्वारा वक्त पर परीक्षा का परिणाम घोषित नही करने से स्थिति उनके लिए कठिन हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम संविधान के आर्टिकल 142 के अंतर्गत मिले अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह आदेश पारित कर रहे है और इसे विशेष मामले के रूप में ले रहे है। बता दे कि इन उम्मीदवारों ने मुख्य परीक्षा पास कर ली थी,पर तय तिथि तक डिग्री का प्रमाणपत्र जमा नही कर पाने के कारण उन्हें आयोग्य घोषित कर दिया गया था।

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने निर्देश दिया कि पांचों साक्षात्कार के लिए चयनित उम्मीदवारों की प्रकाशित सूची के अतिरिक्त होंगे। इससे पूर्व भी यूपीएससी ने कई ऐसे उम्मीदवारो को मुख्य परीक्षा में बैठने दिया,जिन्होंने प्राम्भिक परीक्षा पास कर ली,पर आवेदन के साथ पात्रता परीक्षा का प्रमाणपत्र नही पेश कर सके।

Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Articles