कोर्ट ने खुद की पैरवी करने के लिए आरोपी को इंटरनेट प्रयोग करने की मंजूरी दी।

केरल की एक अदालत ने माओवादी संगठन से लिप्त आरोपित व्यक्ति को अदालत में खुद का बचाव पक्ष रखने के लिए मंजूरी प्रदान कर दी है।

कोर्ट ने अभियुक्त को खुद का बचाव पक्ष रखने के लिए 45 मिनट तक इंटरनेट का प्रयोग कर कानूनी निमावली पर शोध करने के लिए अनुमति प्रदान कर दी है।

आरोपी रूपेश पर माओवादी संगठन के साथ सम्बन्धों को लेकर कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है।

जिसमे उसने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसे खुद का बचाव पक्ष रखने के लिए कानूनी नियमों और जानकारी प्राप्त करने के लिए इंटरनेट का यूज़ करने की मंजूरी दी जाय ।

सत्र न्यायाधीश पी कृष्ण कुमार ने आरोपित रूपेश की इस अर्जी को स्वीकार करते हुए कहा है कि वह केवल कानून की जानकारी ,हाइकोर्ट,सुप्रीम कोर्ट और आईपीसी,मनुपात्रा जैसे लीगल वेबसाइट को ही एक्सेस कर सकता है।

आरोपी रूपेश ने अपना दलील पक्ष रखने के लिए किसी वकील को नियुक्त नही किया है इसलिए वह कोर्ट के समक्ष अपना प्रतिनिधतव्य खुद कर रहा है।

आरोपीत रूपेश ने कोर्ट में याचिका दायर करके इस आधार पर इंटरनेट प्रयोग की अनुमति मांगी थी कि उसका कहना है कि जो कानूनी अध्यन के लिए पुस्तकें है वह उसके पास मौजूद है 

लेकिन और ज्यादा कानूनी शोध के लिए उसे इंटरनेट प्रयोग की अनुमति दी जाय।

क्योंकि उसके ऊपर विभिन्न अदालतों में 39 मुकदमे चलाए जा रहे हैं और अधिकांश मामलों में वह स्वयं पार्टी के रूप में परीक्षण कर रहा है।

राज्य अभियोजक ने भी आरोपीत की इस याचिका पर आपत्ति न जताते हुए कहा है कि यदि अभियुक्त को सीमित समय के लिए इंटरनेट उपलब्ध कराया जाय तो उन्हें कोई आपत्ति नही है।

राज्य अभियोजक ने कोर्ट से इस बात पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है कि अभियुक्त द्वारा इंटरनेट प्रयोग के दौरान देखा जाय कि वह केवल कानूनी कार्य के लिए इंटरनेट का उपयोग कर रहा है न कि अपने साथियों को मैसेज भेजने में।

कोर्ट ने देखा है कि अभियुक्त को अच्छी कानूनी जानकारी है साथ ही साथ इंटरनेट उपयोग की भी अच्छी जानकारी रखता है इससे कोर्ट उससे प्रभावित थी।

निर्णय-

कोर्ट के न्यायाधीश ने याची की याचिका मंजूर करते हुए कुछ नियम व शर्तों के साथ उसे अपना बचाव पक्ष रखने के लिए कानूनी शोध करने के लिए इंटरनेट प्रयोग करने की अनुमति प्रदान कर दी है।

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