बेंगलुरु बीबीएमपी चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 31 अगस्त तक बढ़ाई समय सीमा, कर्नाटक सरकार को दी ‘मशीनरी सक्रिय’ करने की आखिरी चेतावनी

बेंगलुरु में पिछले कई सालों से बने लोकतांत्रिक शून्य को समाप्त करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को शहर के बहुप्रतीक्षित स्थानीय निकाय चुनावों को कराने की समय सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी है।

हालांकि, अदालत ने कर्नाटक सरकार को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यह अंतिम विस्तार है और इसके बाद चुनाव टालने के लिए एक दिन का भी अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

गौरतलब है कि वृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) में निर्वाचित पार्षदों का कार्यकाल 10 सितंबर 2020 को ही समाप्त हो चुका है। तब से लेकर अब तक सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक ही शहर के रोजमर्रा के कामकाज को संभाल रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव संपन्न कराने की समय सीमा को पहले तय की गई तारीख (30 जून) से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया है।

सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि राज्य में कर्मचारियों की भारी कमी है। उन्होंने बताया कि राज्य के प्रशासनिक कर्मी इस समय राष्ट्रीय जनगणना के कार्यों और मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) में व्यस्त हैं।

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सिंघवी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि चुनावों के लिए जरूरी बजटीय आवंटन पहले ही पूरा किया जा चुका है, लेकिन तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए दो से तीन महीने का अतिरिक्त समय चाहिए।

पीठ ने इस व्यावहारिक कठिनाई को देखते हुए समय तो बढ़ा दिया, लेकिन भविष्य में किसी भी बहानेबाजी को खारिज करते हुए मौखिक टिप्पणी की:

“जाइए और अपनी मशीनरी को सक्रिय कीजिए।”

आगामी स्थानीय निकाय चुनाव बेंगलुरु के प्रशासनिक इतिहास में एक नए युग की शुरुआत करेंगे। कर्नाटक नगर निगम (तीसरा संशोधन) अधिनियम, 2020 के तहत शहर की प्रशासनिक सीमाओं का पूरी तरह से पुनर्गठन किया गया है।

इस बार चुनाव का पैमाना पहले से कहीं अधिक बड़ा और व्यापक होगा:

  • नया प्रशासनिक ढांचा: अब ग्रेटर बेंगलुरु एरिया (GBA) के भीतर बनाए गए पांच नए नगर निगमों के कुल 369 वार्डों के लिए मतदान होगा।
  • पुराना ढांचा: इससे पहले के चुनावों में शहर में केवल 198 वार्ड हुआ करते थे।
  • विशाल विस्तार: इस पुनर्गठन के तहत शहर में सीधे 171 नए वार्डों की बढ़ोतरी हुई है। राज्य सरकार ने इन सभी 369 वार्डों के लिए आरक्षण सूची भी अधिसूचित कर दी है।
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ग्रेटर बेंगलुरु एरिया में नए निगमों और बीबीएमपी चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट लंबे समय से लगातार निगरानी कर रहा है। इस पूरी चुनावी प्रक्रिया को यहाँ तक पहुँचने के लिए कई कानूनी अड़चनों को पार करना पड़ा है:

  • दिसंबर 2020: कर्नाटक हाई कोर्ट ने वार्डों की संख्या बढ़ाने वाले संशोधन की संवैधानिक वैधता को तो बरकरार रखा, लेकिन इसके दायरे को सीमित कर दिया। हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह नया संशोधन उन चुनावों पर लागू नहीं हो सकता जो संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत पहले से ही लंबित हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को तुरंत चुनाव कराने का निर्देश दिया था।
  • 18 दिसंबर 2020: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी और राज्य सरकार की अपील पर विचार शुरू किया।
  • साल 2022: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह बीबीएमपी सीमाओं के निर्धारण (परिसीमन) की जटिल प्रक्रिया को पूरा करे और आठ सप्ताह के भीतर इसे अधिसूचित करे।
  • 12 जनवरी (इसी वर्ष): शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को 20 फरवरी तक अंतिम वार्ड-वार आरक्षण सूची प्रकाशित करने और 30 जून तक पूरी चुनावी प्रक्रिया समाप्त करने का निर्देश दिया था, जिसे अब बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा 31 अगस्त की लक्ष्मण रेखा तय किए जाने के बाद, अब गेंद पूरी तरह से कर्नाटक सरकार के पाले में है। बेंगलुरु की जनता को उनका लोकतांत्रिक अधिकार समय पर सौंपना अब राज्य की मशीनरी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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