उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के खाली पदों को चार महीने में भरे राज्य सरकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य के बाल कल्याण नियामक निकाय (बाल अधिकार संरक्षण आयोग) में खाली पड़े सभी पदों को अत्यंत प्राथमिकता के आधार पर भरने का निर्देश दिया है। जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर उसे जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह निर्देश उन दलीलों पर दिया जिसमें कहा गया था कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने वाला यह आयोग डेढ़ साल से अधिक समय से पूरी तरह से निष्क्रिय पड़ा हुआ है।

मामले की पृष्ठभूमि

इस मामले की कानूनी कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर एक रिट याचिका के जरिए शुरू हुई थी। याचिकाकर्ता (एक गैर-सरकारी संगठन) ने अपनी सचिव के माध्यम से हाईकोर्ट का रुख किया था।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से यह मांग की थी कि उत्तर प्रदेश सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव को संगठन द्वारा पहले सौंपे गए एक प्रतिवेदन पर निर्णय लेने के लिए निर्देश दिया जाए। इसके साथ ही, याचिका में प्रतिवादी राज्य अधिकारियों को उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया को एक निश्चित समय सीमा के भीतर तुरंत शुरू करने और पूरा करने के लिए आदेश देने की भी मांग की गई थी।

पक्षकारों की दलीलें

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं दुर्गेश कुमार शुक्ला और सुश्री विश्व मोहिनी ने आयोग की प्रशासनिक विफलता और पूरी तरह ठप होने का मुद्दा उठाया। वकीलों ने तर्क दिया कि “नवंबर 2024 से उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में कोई सदस्य या अध्यक्ष नहीं है। पूरा आयोग खाली है और इस वजह से यह पूरी तरह से निष्क्रिय पड़ा हुआ है।”

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश राज्य और संबंधित विभाग का पक्ष मुख्य स्थायी अधिवक्ता (सीएससी) ने कोर्ट के समक्ष रखा।

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कोर्ट का विश्लेषण और निर्णय

याचिकाकर्ता की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद, खंडपीठ ने माना कि बच्चों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार निकाय में सभी पदों का खाली होना एक अत्यंत गंभीर मामला है।

प्रशासनिक स्तर पर हुई देरी को संज्ञान में लेते हुए, जस्टिस सराफ और जस्टिस चौधरी की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका को लंबित रखने के बजाय तुरंत प्रशासनिक कदम उठाने के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना उचित समझा।

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कोर्ट ने निर्देश देते हुए कहा: “हम राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि वह इस मामले को युद्ध स्तर पर देखे और जल्द से जल्द, अधिमानतः आज की तारीख से चार महीने की अवधि के भीतर सदस्यों और अध्यक्ष की नियुक्ति करे।”

इन महत्वपूर्ण निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने इस रिट याचिका को औपचारिक रूप से निपटा दिया।

मामले का विवरण

मामले का शीर्षक: ह्यूमन यूनिटी मूवमेंट (हम) द्वारा सचिव डॉ. संगीता शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, लखनऊ व अन्य

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वाद संख्या: जनहित याचिका (पीआईएल) संख्या 537/2026

पीठ: जस्टिस शेखर बी. सराफ, जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी

निर्णय की तिथि: 2 जून, 2026

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