सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन की पासपोर्ट वापस करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई 2 नवंबर तक टाल दी है। कप्पन ने हाथरस साजिश मामले में जमानत की शर्तों के तहत अपना पासपोर्ट जांच एजेंसियों के पास जमा कराया था।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता रुचिरा गोयल के अनुरोध पर सुनवाई स्थगित की।
गोयल ने कोर्ट को बताया कि उन्हें कप्पन की अर्जी की प्रति मंगलवार सुबह ही मिली है। इस पर राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने उनका अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को तय कर दी।
जमानत की शर्तों के तहत जमा कराया गया था पासपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर 2022 को कप्पन को जमानत दी थी। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
जमानत देते समय सुप्रीम कोर्ट ने कप्पन पर कई शर्तें लगाई थीं। इनमें पासपोर्ट जांच एजेंसियों के पास जमा करना और उनकी आवाजाही पर कुछ प्रतिबंध शामिल थे।
कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जेल से रिहा होने के बाद कप्पन अगले छह महीने दिल्ली में रहेंगे और प्रत्येक सोमवार को निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
छह महीने पूरे होने के बाद उन्हें केरल के मलप्पुरम स्थित अपने घर जाने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, वहां भी प्रत्येक सोमवार को स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करना अनिवार्य था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि कप्पन ट्रायल कोर्ट की स्पष्ट अनुमति के बिना दिल्ली के क्षेत्राधिकार से बाहर नहीं जाएंगे। इसके अलावा उन्हें प्रत्येक सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के माध्यम से ट्रायल कोर्ट में उपस्थित होना था।
अब कप्पन ने इन्हीं जमानत शर्तों के तहत जमा किए गए पासपोर्ट को वापस पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया है।
हाथरस जाते समय अक्टूबर 2020 में हुई थी गिरफ्तारी
सिद्दीक कप्पन को 6 अक्टूबर 2020 को उत्तर प्रदेश के हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया गया था। वह वहां एक दलित युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और उसकी मौत की घटना की रिपोर्टिंग करने जा रहे थे।
पुलिस ने उन पर घटना के बाद दंगे भड़काने की कथित साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
इस मामले की एफआईआर में चार लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनके प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से कथित संबंध बताए गए थे। पुलिस का आरोप था कि आरोपी हाथरस में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी जमानत याचिका
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने से पहले कप्पन की जमानत याचिका मथुरा की अदालत ने खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
वर्ष 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।
हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों, अपराध की प्रकृति, रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों, आरोपी की कथित संलिप्तता, संभावित सजा की गंभीरता और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानूनी सिद्धांतों पर विचार किया था।
हाईकोर्ट ने कहा था कि मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना उस चरण में आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा।
इसके बाद कप्पन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां उन्हें 9 सितंबर 2022 को शर्तों के साथ जमानत मिल गई।
क्या था हाथरस मामला?
हाथरस में 14 सितंबर 2020 को एक दलित युवती के साथ उसके गांव के चार लोगों द्वारा कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आई थी।
घटना के लगभग दो सप्ताह बाद युवती की दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई थी।
युवती का अंतिम संस्कार उसके गांव में आधी रात को किया गया था। परिवार ने आरोप लगाया था कि अंतिम संस्कार उनकी सहमति के बिना किया गया और उन्हें अंतिम बार शव घर लाने की अनुमति भी नहीं दी गई।
इसी घटना की रिपोर्टिंग के लिए हाथरस जा रहे पत्रकार सिद्दीक कप्पन को गिरफ्तार किया गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट 2 नवंबर को उनके पासपोर्ट की वापसी से संबंधित आवेदन पर सुनवाई करेगा।
