झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक स्कूल शिक्षक नियुक्ति परीक्षा में सामने आई कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सीआईडी को तत्काल प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने 29 अगस्त को दिए अपने आदेश में राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि चयन प्रक्रिया की शुचिता से खिलवाड़ करने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ सीआईडी में फौरन आपराधिक मामला दर्ज कराया जाए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा इस भर्ती के तहत की जाने वाली सभी नियुक्तियां सीआईडी जांच के अंतिम नतीजों के अधीन रहेंगी।
अदालत ने रेखांकित किया कि शिक्षक आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवारते हैं, और यही छात्र आगे चलकर देश के महत्वपूर्ण निजी, प्रशासनिक या संवैधानिक पदों को संभाल सकते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की पवित्रता को ठेस पहुंचाने वालों को न्याय के कटघरे में लाना व्यापक जनहित में आवश्यक है, ताकि चयन प्रक्रिया पर योग्य अभ्यर्थियों का भरोसा बना रहे और भविष्य में ऐसा करने वालों में डर पैदा हो। अदालत ने आयोग को निर्देश दिया कि वह पुनर्परीक्षा के लिए चिह्नित सभी 2,819 अभ्यर्थियों के प्राप्तांक दो सप्ताह के भीतर सार्वजनिक और संप्रेषित करे। इसके अलावा गड़बड़ी में शामिल किसी भी कर्मी या संबंधित पक्ष के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जाए।
गड़बड़ी स्वीकारने के बाद भी एफआईआर न कराने पर आयोग को फटकार
हाईकोर्ट ने जेएसएससी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि धांधली की बात स्वीकार करने के बावजूद आयोग ने अब तक आपराधिक मामला दर्ज क्यों नहीं कराया। पीठ ने माना कि आयोग आपराधिक अभियोजन से बचने का प्रयास कर रहा है, जिससे लगता है कि वास्तविक दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। अदालत के अनुसार, इन अनियमितताओं के लिए आयोग के अपने कर्मचारी, रांची के परीक्षा केंद्रों का संचालन करने वाली अनुबंधित निजी एजेंसी अथवा संबंधित कंप्यूटर केंद्र जिम्मेदार हो सकते हैं।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि निजी ठेकेदार एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर स्वयं ही पुनर्परीक्षा कराने का फैसला लेना “अपने ही मामले में खुद न्यायाधीश बनने” जैसा है, जो नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। हालांकि, हाईकोर्ट ने पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करने से मना कर दिया, क्योंकि उम्मीदवार डिवीजन बेंच के पूर्व आदेश के तहत पहले ही पुनर्परीक्षा दे चुके हैं। पीठ ने माना कि ऐसे में सीआईडी द्वारा त्वरित और निष्पक्ष जांच ही निर्दोष अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने का सबसे उपयुक्त रास्ता है।
पुनर्परीक्षा में 18 अतिरिक्त अभ्यर्थियों के शामिल होने पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान पुनर्परीक्षा के आंकड़ों में सामने आई विसंगतियों पर भी अदालत ने संज्ञान लिया। आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, पुनर्परीक्षा में 2,355 अभ्यर्थी उपस्थित हुए जबकि 482 अनुपस्थित रहे। इस तरह कुल संख्या 2,837 दर्ज की गई, जो मूल सूची के 2,819 अभ्यर्थियों से 18 अधिक थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रूपेश सिंह ने दलील दी कि आयोग ने 2,819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा की आड़ में 18 अतिरिक्त उम्मीदवारों को गैर-कानूनी तरीके से शामिल कर लिया। हाईकोर्ट ने पाया कि आयोग का इस विसंगति पर दिया गया स्पष्टीकरण उसके हलफनामे या पेश किए गए दस्तावेजों से प्रमाणित नहीं होता। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई थी कि स्वतंत्र आपराधिक जांच के अभाव में प्रणालीगत खामियां बनी रहेंगी और दोषी बच निकलेंगे, जिससे भविष्य की परीक्षाओं में भी ऐसी हरकतों को बढ़ावा मिलेगा। इस मामले में राज्य सरकार का पक्ष अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने रखा।
उत्तर कुंजी और तकनीकी गड़बड़ी से उपजा विवाद
कक्षा 9 से 12 तक के शिक्षकों के पदों के लिए यह कंप्यूटर आधारित परीक्षा 15 जनवरी से 22 फरवरी के बीच विभिन्न तिथियों में संपन्न हुई थी। इसमें पेपर-1 क्वालिफाइंग था, जबकि मेरिट के निर्धारण के लिए पेपर-2 महत्वपूर्ण था। परीक्षा के दौरान अनधिकृत मल्टीपल लॉगिन, सिस्टम में अवैध दखल और तकनीकी खामियों की बातें सामने आई थीं।
आयोग ने आपत्तियों के निस्तारण के बाद 15 अप्रैल को अंतिम उत्तर कुंजी जारी की। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट की शरण ली और आरोप लगाया कि आयोग ने अन्य उम्मीदवारों को रिस्पॉन्स शीट उपलब्ध कराई, लेकिन उनकी रिस्पॉन्स शीट और आंसर की रोक ली गई, जिससे वे अनंतिम उत्तर कुंजी को चुनौती देने के अवसर से वंचित रह गए।
विवाद बढ़ने पर आयोग ने 23 अप्रैल 2026 को तकनीकी त्रुटियों और संदिग्ध गतिविधियों का हवाला देते हुए 2,819 अभ्यर्थियों के लिए 8 मई को पेपर-2 की पुनर्परीक्षा की अधिसूचना जारी की थी। अभ्यर्थियों ने इस पुनर्परीक्षा को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन डिवीजन बेंच ने 7 मई को परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद यह पुनर्परीक्षा कराई गई थी।

