सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से जुड़े छात्रों के खिलाफ देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज FIR रद्द करने का आदेश दिया। हालांकि, गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को इस राहत से बाहर रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्र सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद CJP ने दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना विरोध मार्च वापस ले लिया है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह आदेश केंद्र की ओर से यह बताए जाने के बाद दिया कि जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़े मामले वापस लिए जाएंगे और उन्हीं घटनाओं को लेकर भविष्य में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वालों को राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को FIR रद्द करने का लाभ नहीं मिलेगा। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर प्रदर्शन में मौजूद ऐसे 2,873 लोगों से संबंधित एक FIR में कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी, जिनके बारे में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने की बात कही गई है।
सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र की ओर से दिल्ली पुलिस के साथ-साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIR रद्द करने के लिए आवेदन दाखिल किए हैं।
मेहता के मुताबिक, इन आवेदनों में यह भी भरोसा दिया गया है कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुई प्रदर्शन संबंधी घटनाओं को लेकर भविष्य में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि ये आवेदन 25 जुलाई को CJP नेताओं को केंद्र की ओर से दिए गए आश्वासन को पूरा करने के लिए दाखिल किए गए हैं।
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि दोनों पक्ष आपसी भरोसे के साथ बातचीत करें तो इस मुद्दे का समाधान निकाला जा सकता है। इस पर मेहता ने कोर्ट को बताया कि दोनों पक्षों ने मामले में सकारात्मक और रचनात्मक रुख अपनाया है और वे एक-दूसरे को विरोधी पक्ष के रूप में नहीं देख रहे हैं।
CJP ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र के आश्वासन और कोर्ट के आदेश को देखते हुए संगठन ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है।
दास ने केंद्र के रुख की सराहना करते हुए कोर्ट को बताया कि CJP को उम्मीद है कि सरकार कोर्ट के समक्ष दिए गए आश्वासनों और मंगलवार के आदेश का पालन करेगी। उन्होंने कोर्ट और दोनों पक्षों के वकीलों के प्रति भी आभार जताया।
CJP ने छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए 5 सितंबर को प्रदर्शन का आह्वान किया था।
मुआवजे की प्रक्रिया तय करने के लिए केंद्र को तीन महीने
सुनवाई के दौरान NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आया।
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि केंद्र प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के अपने आश्वासन पर कायम है। हालांकि, इसके लिए प्रक्रिया और तौर-तरीके तय करने के लिए तीन महीने का समय मांगा गया।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को तीन महीने के भीतर मुआवजे से जुड़ी प्रक्रिया और तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया।

