फॉर्च्यून सोयाबीन तेल पर FSSAI के नोटिस के खिलाफ याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और प्राधिकरण से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘फॉर्च्यून सोया हेल्थ रिफाइंड सोयाबीन तेल’ के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने वाले नियामक निर्देशों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से जवाब तलब किया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत ने अधिकारियों की क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार से जुड़ी शुरुआती आपत्तियों को खारिज करते हुए केंद्र और FSSAI को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।

अधिकार क्षेत्र पर अधिकारियों की आपत्ति खारिज

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी अधिकारियों ने याचिका के विचारणीय होने पर सवाल उठाते हुए दलील दी थी कि दिल्ली हाईकोर्ट के पास इस मामले की सुनवाई का क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं है। उनका कहना था कि याचिकाकर्ता कंपनी, AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड, गुजरात में स्थित है और इस खाद्य तेल का निर्माण तथा बिक्री भी राष्ट्रीय राजधानी से बाहर की जाती है।

जस्टिस शर्मा ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि कंपनी ने जिन मूल नियामक कार्यवाहियों को चुनौती दी है, वे FSSAI द्वारा दिल्ली स्थित मुख्यालय से ही शुरू की गई थीं। अदालत ने कहा कि FSSAI इस अदालत के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में स्थित प्राधिकरण है, इसलिए जिनके खिलाफ रिट याचिका दायर की गई है, वे अदालत के अधिकार क्षेत्र के दायरे में आते हैं।

लेबल और विज्ञापनों से जुड़ा विवाद

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यह विवाद AWL एग्री बिजनेस के उत्पाद ‘फॉर्च्यून सोया हेल्थ रिफाइंड सोयाबीन तेल’ की पैकेजिंग पर किए गए दावों से संबंधित है। उत्पाद के पैकेट पर “100% Veg” (100% शाकाहारी) और “Cholesterol Free – For Healthy Lifestyle” (कोलेस्ट्रॉल मुक्त – स्वस्थ जीवनशैली के लिए) के दावे मुद्रित थे।

FSSAI ने 17 जुलाई को कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए आरोप लगाया था कि ये दावे खाद्य सुरक्षा और मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 और खाद्य सुरक्षा और मानक (लेबलिंग एवं प्रदर्शन) विनियम, 2020 का उल्लंघन करते हैं। नियामक ने कंपनी को सात दिनों के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा था कि उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।

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देशभर में सप्लाई चेन और बिक्री पर पड़ा प्रभाव

कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ ही FSSAI ने 17 जुलाई को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को एक पत्र भेजा था। इसमें निर्देश दिया गया था कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में ऐसे उत्पादों का निर्माण, वितरण, विपणन या बिक्री न होने दें, जिन्हें नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया है।

याचिका में कंपनी ने कहा कि इस पत्र की वजह से उसके सोयाबीन तेल को नियमों का उल्लंघन करने वाला उत्पाद मान लिया गया, जिससे देशभर में उसके वितरकों, स्टॉकिस्टों, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं पर प्रवर्तन कार्रवाई का खतरा मंडराने लगा। AWL एग्री बिजनेस के अनुसार, अगस्त में वितरकों ने सूचना दी कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने उनके ठिकानों का दौरा कर उत्पाद की बिक्री रुकवा दी। इसके बाद खुदरा विक्रेताओं ने नए ऑर्डर रद्द कर दिए और पहले से मौजूद स्टॉक को वापस लेने की मांग शुरू कर दी।

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