संजय कपूर संपत्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट को मध्यस्थता से सौहार्दपूर्ण समाधान की उम्मीद, 2 नवंबर तक बढ़ा समय

दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के पारिवारिक ट्रस्ट को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि मामला आपसी सहमति से सुलझ सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की देखरेख में चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया संतोषजनक ढंग से आगे बढ़ रही है। मामले की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने मध्यस्थता की समयसीमा को 2 नवंबर तक बढ़ाने का अनुरोध स्वीकार कर लिया।

खुले मन से मध्यस्थता में शामिल हों पक्ष: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थ द्वारा प्रस्तुत की गई प्रारंभिक रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया है कि अब तक मध्यस्थता के छह सत्र आयोजित किए जा चुके हैं और मध्यस्थ ने परिवार के सभी सदस्यों से व्यक्तिगत बातचीत की है। पीठ ने कहा कि सभी पक्ष इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

सुनवाई के दौरान पीठ ने परिवार के सदस्यों से कहा कि उन्हें खुले मन और दिल से मध्यस्थ के समक्ष जाना चाहिए ताकि वे किसी लंबी कानूनी लड़ाई में न फंसें। कोर्ट ने कहा कि वह मध्यस्थता की अगली रिपोर्ट का इंतजार करेगा।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मध्यस्थ की फीस का भुगतान सीधे आरके फैमिली ट्रस्ट से किया जाएगा और इस विषय पर कोई विवाद या बहस नहीं होनी चाहिए। पक्षों को आगाह करते हुए पीठ ने कहा कि यदि मध्यस्थता विफल होती है, तो सभी को कानून के अनुसार आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन पक्षों को ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होने देनी चाहिए।

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ट्रस्ट को फर्जी और धोखाधड़ी बताने का आरोप

यह विवाद संजय कपूर की 80 वर्षीय मां रानी कपूर द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। उन्होंने अक्टूबर 2017 में गठित ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ को अमान्य और रद्द घोषित करने की मांग की है। रानी कपूर का आरोप है कि यह ट्रस्ट जाली और धोखाधड़ी से तैयार किए गए दस्तावेजों के आधार पर बनाया गया था।

याचिका के अनुसार, रानी कपूर अपने दिवंगत पति और ‘सोना ग्रुप ऑफ कंपनीज’ के संस्थापक सुरिंदर कपूर की पूरी संपत्ति की एकमात्र कानूनी वारिस हैं। उनका कहना है कि उनकी जानकारी के बिना संपत्तियों को इस ट्रस्ट में स्थानांतरित करके उनके साथ धोखाधड़ी की गई।

रानी कपूर ने कोर्ट से मांग की है कि ट्रस्ट की संपत्तियों के हस्तांतरण पर यथास्थिति बनाए रखी जाए और उनकी बहू प्रिया कपूर, पोते-पोतियों तथा अन्य प्रतिवादियों को ट्रस्ट के संचालन या उससे धनराशि निकालने से स्थायी रूप से रोका जाए।

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इससे पहले 27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने रानी कपूर की याचिका पर प्रिया कपूर और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए पक्षों को मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने का सुझाव दिया था।

हाईकोर्ट में भी लंबित हैं समानांतर मामले

संजय कपूर का निधन 12 जून 2025 को इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हो गया था। रानी कपूर की याचिका में कहा गया है कि संजय कपूर ने अपने जीवनकाल में कभी भी उन्हें संपत्ति के अधिकार खत्म होने या ट्रस्ट के गठन की जानकारी नहीं दी थी।

पारिवारिक संपत्ति के अधिकार और नियंत्रण से जुड़ा मुख्य मामला वर्तमान में दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। इसके अलावा, दिल्ली हाईकोर्ट में एक अन्य याचिका संजय कपूर की पूर्व पत्नी व अभिनेत्री करिश्मा कपूर के दो बच्चों की ओर से दायर की गई है। इसमें उन्होंने अपने दिवंगत पिता की वसीयत की प्रामाणिकता को चुनौती देते हुए प्रिया कपूर पर वित्तीय अनुचितता और लालच के आरोप लगाए हैं।

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