इलाहाबाद हाईकोर्ट- यूपी में कोई भी बिना मास्क के घर के बाहर न दिखे

इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक खंडपीठ जिसमें माननीय श्री न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और माननीय न्यायमूर्ति अजीत कुमार शामिल हैं, ने पूरे उत्तर प्रदेश राज्य के लिए एक आदेश जारी किया है कि किसी भी व्यक्ति को उसके घर के बाहर / उसके मास्क के बिना नहीं देखा जाना चाहिए। उसका चेहरा और नाक और मुंह दोनों मास्क से ढका होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में कोविड 19 के प्रसार पर रोक लगाने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय राज्य सरकार की कार्रवाइयों की निगरानी कर रहा है।

इससे पहले उच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर कई निर्देश जारी किए हैं, जो यहां पढ़े जा सकते हैं।

23.09.2020 को, जब इस मामले की सुनवाई हुई तो, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निम्नलिखित पांच मुद्दों पर सुनवाई की –

सार्वजनिक भूमि का अतिक्रमण और पार्किंग का खतरा;
टाउन वेंडिंग समिति द्वारा कार्य का निर्वहन;
प्रयुक्त मास्क का व्यवस्थापन;
जनता द्वार मास्क का उपयोग; तथा
कोविड 19 के दौरान आगे की चिकित्सा सुविधा।

पहला मुद्दा-

इसके के संबंध में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिविल लाइंस क्षेत्र में वाहनों की अवैध पार्किंग की अनुमति नहीं दी जा सकती है, क्योंकि वहॉ पहले से ही एक पार्किंग स्थल सौंपा गया है और उसी के लिए एक विशाल भवन का निर्माण किया गया है। लोग दुकानों तक पहुंचने के लिए बिजली के रिक्शा आदि की सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन वाहन को पार्किंग क्षेत्र में ही पार्क किया जाना चाहिए।

दूसरा मुद्दा-

डिवीजन बेंच ने आदेश दिया कि टाउन वेंडिंग कमेटी तुरंत कार्रवाई करेगी और लंबित जोनों की मंजूरी की कवायद आज से एक हफ्ते के भीतर पूरी कर ली जाएगी और इसके बाद आवंटन की एक्सरसाइज आगे की पहचान के लिए साइड एक्सरसाइज के जरिए तीन दिनों के भीतर की जाएगी।

इसके अलावा आवंटन की मंजूरी के बारे में एक व्यापक रिपोर्ट 1 अक्टूबर, 2020 को या उससे पहले प्रस्तुत की जाएगी और नए वेंडिंग जोन की पहचान करने के लिए अभ्यास किया जाएगा और इसकी मंजूरी अगले 15 दिनों में दी जाएगी और इसके बारे में रिपोर्ट 17 अक्टूबर तक प्रस्तुत की जाएगी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि नगर निगम सभी वाणिज्यिक को सूचित करेगा कि विभिन्न व्यावसायिक स्थानों के दुकानदार इस्तेमाल किए गए मास्क को इकट्ठा करने के लिए डस्टबीन के डिब्बे लगाये और नगर निगम प्रतिदिन उसे एकत्र करेगा।

तीसरा मुद्दा-

आगे यह निर्देश दिया गया है कि यदि दुकानदार यहां जारी निर्देशों का उल्लंघन करते हैं, तो उन्हें नगर निगम द्वारा नोटिस दिया जाएगा और उचित रूप से उसी के लिए दंडित किया जाएगा।


चौथा मुद्दा-

कोर्ट ने द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन शीर्षक से एक रिपोर्ट पर विचार किया, जो 08.09.2020 को प्रकाशित की गयी थी, जिसमें कहा गया है कि नवीनतम शोध के अनुसार मास्क पहनने से व्यक्ति औरो को संक्रमित नहीं करता है, बल्कि जो मास्क पहन रहा है उसे भी संक्रमण होने से बचाया जा सकता है। अगर हर कोई एक मास्क पहनता है, तो यह पूरी दुनिया के लिए वायरस के बल को कम करेगा, जिसके परिणामस्वरूप वायरस का उन्मूलन होगा।

कोर्ट ने पाया कि लेख से, ऐसा प्रतीत होता है कि यह अब इस वायरस के प्रभाव से सभ्यता को बचाने के लिए उपलब्ध अंतिम अवसर है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि आज इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि टीके के बाद के प्रभाव क्या होंगे। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह सुनिश्चित किया है कि यदि 100 प्रतिशत लोग मास्क पहने तो वायरस अपने आप ही समाप्त हो जाएगा।

उपर्युक्त परिस्थितियों में, इलाहाबाद हाईकोट ने पूरे उत्तर प्रदेश राज्य के लिए एक आदेश जारी किया कि किसी भी व्यक्ति को उसके चेहरे पे बिना मास्क के उसके घर के बाहर नहीं देखा जाना चाहिए और उसे देखना चाहिए कि मास्क नाक और मुंह दोनों को कवर करता है।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश राज्य के सभी जिलों की पुलिस को सभी जिलों में टास्क फोर्स की तैनाती करनी चाहिए। प्रत्येक टास्क फोर्स में कई पुलिस कर्मी शामिल होने चाहिए जो वर्तमान में तैनात किए गए हैं। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि इस आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर दण्ड मिलेगा।

माननीय न्यायाधीशों ने यह भी निर्देश दिया कि पुलिस और प्रशासन यह कहकर दूर नहीं जा सकते कि लोगों को मास्क न पहनने के लिए दोषी ठहराया जाए। वे यह नहीं कह सकते कि उनके सर्वाेत्तम प्रयासों के बावजूद, मास्क नहीं पहना जा रहा है। लोगों और प्रशासन को यह महसूस करना चाहिए कि आज मास्क पहनना केवल उस व्यक्ति की सुरक्षा के लिए नहीं है जो इसे पहन रहा है बल्कि यह अब पूरे समाज की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है, और यदि कोई व्यक्ति समाज के खिलाफ अपराध करता है, तो उसे उसका दण्ड मिलेगा। यह आगे निर्देशित किया गया है कि जिस समय कोई व्यक्ति बिना मास्क के सार्वजनिक रूप से मिल जाता है तो पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।


कोर्ट ने निर्देशित किया है कि हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर जोनल अधिकारियों और नगर आयुक्तों को ईमेल आईडी के माध्यम से रिपोर्ट देंगे। साथ ही साथ वे अपनी रिपोर्ट ईमेल आईडी पर रजिस्ट्रार, लीगल सेल, हाईकोर्ट इलाहाबाद को दैनिक आधार पर टास्क फोर्स के अभ्यास के बारे में मेल करेंगे और अपर महाधिवक्ता को भी भेजेंगे।

पॉंचवा मुद्दा

इस मुद्दे पर, अदालत ने प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जो भी जानकारी प्रदान की जाती है, उस व्यक्ति के नाम के खिलाफ दर्ज किया जाना चाहिए, जिसके संबंध में जांच की जा रही थी और पोर्टल को वास्तव में दिन के आधार पर अद्यतन किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने निर्देशित किया है कि राज्य के प्रत्येक जिले मेंएक समर्पित क्लिनिक होना चाहिए (यह हर जिले के नगरपालिका के क्लीनिक में हो सकता है) जहां एक व्यक्ति जो घर में क्वारंटीन है, वह जा सकता है और अपना सी.टी. स्कैन या एक्स-रे करा सकता है।

कोर्ट ने 28 सितंबर 2020 को सुबह 10 बजे फिर से मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

साथ ही साथ यह भी आदेश दिया है कि इस आदेश की प्रति अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश, पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ और सभी जिलाधिकारियों, एसएसपी और सभी जिलों के एसपी के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। तााकि 48 घंटे के भीतर आवश्यक कार्यवाही की जा सकें।

Case Details:-

Title:- In-Re Inhuman Condition At Quarantine Centres And For

Providing Better Treatment To Corona Positive vs State of U.P

Case No. PIL No. 574 of 2020

Date Of Order: 23.09.2020

Quorum:- Hon’ble Mr. Justice Siddharth Verma and Justice Ajit Kumar

Advocate:- 

Counsel for the Petitioner – Gaurav Kumar Gaur,Aditya Singh, Parihar, Amitanshu Gour, Jitendra Kumar, Katyayini, Rahul Sahai,Rishu, Mishra, S.P.S. Chauhan, Satyaveer Singh, Shailendra Garg,

For Respondent:C.S.C.,Dhiraj Singh,Hari Nath Tripathi,Purnendu Kumar Singh,Satyavrat Sahai,Sunil Dutt Kautilya

Download Law Trend App

Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles