कोरोना रोगियों के लिए 80 प्रतिशत आईसीयू बेड आरक्षित करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

22 सितंबर, 2020 को दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति नवीन चावला ने एक आदेश पारित किया, जिसमें दिल्ली सरकार के द्वारा जारी 12.09.2020 के आदेश के क्रियानवन पर रोक लगा दी गयी।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार ने अपने आदेश दिनांक 12.09.2020 द्वारा राज्य के निजी अस्पतालों को निर्देश दिया था कि वे कोरोना (कोविड 19) रोगियों के लिए आईसीयू के 80 प्रतिशत बेड आरक्षित करें।

मामले के संक्षिप्त तथ्य –

एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया द्वारा यह याचिका दायर की गई थी, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट सेे दिल्ली सरकार द्वारा जारी 12.09.2020 के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।याचिकाकर्ताओं ने यह निर्देश मॉंगा है कि अस्पतालों में आईसीयू के 80 फीसदी बेड कोरोना रोगियों के लिए आरक्षित नहीं होने चाहिए। साथ ही अस्पतालों को अस्थायी रूप से अपनी कुल बिस्तर क्षमता को 30 प्रतिशत तक बढ़ाने की अनुमति दी जाये, जिसका उपयोग कारोना रोगियों द्वारा भी किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए तर्क –

याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए तर्कों के अनुसार, दिल्ली सरकार का आदेश पूर्णतया गलत है क्योंकि यह कोरोना और गैर-कोरोना रोगियों के बीच भेदभाव करता है, जबकि उन्हें दोनों को आपातकालीन उपचार देने की आवश्यकता होती है।

यह भी अदालत में प्रस्तुत किया गया था कि अस्पताल कोरोना मरीजों के लिए खाली अस्पताल के बिस्तर आरक्षित नहीं कर सकते हैं क्योंकि अन्य रोगियों को उनकी आवश्यकता हो सकती है।

यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दिल्ली सरकार आदेश करने से पूर्व अन्य रोगियों पर कोई विचार नहीं किया गया था।

सरकार का पक्ष


सरकार ने तर्क दिया कि आदेश सार्वजनिक हित में पारित किया गया था क्योंकि दिल्ली में कोरोना मामलों में अचानक वृद्धि हुई थी।

उन्होंने हाईकोर्ट के समक्ष यह भी कहा कि कोरोना की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है, अतः ऐसा निर्णय लेना सरकार के जरूरी था।

उत्तरदाताओं के वकील ने यह भी कहा कि भेदभाव का आरोप पूर्णतया गलत हैं, हाईकोर्ट को आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने अस्पताल में खाली पड़े बेड की संख्या से भी कोर्ट को अवगत कराया, और भर्ती मरीजों की संख्या भी कोर्ट के साथ साझा की गई।

दिल्ली हाईकोर्ट का तर्क

न्यायालय ने कहा कि ब्व्टप्क् 19 रोगियों के लिए 80 प्रतिशत प्ब्न् बेड आरक्षित करने का आदेश उन रोगियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन था जो अन्य बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं। कोर्ट कोर्ट के अनुसार, सरकार ब्व्टप्क् 19 से पीड़ित रोगियों और अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों के बीच भेदभाव नहीं कर सकती है।

यह भी देखा गया कि यह स्पष्ट नहीं था कि सरकार आईसीयू बेड को आरक्षित करने के अपने निर्णय पर कैसे पहुंची क्योंकि कोर्ट के इस दावे के समर्थन में कोई डेटा नहीं रखा गया था कि 80 फीसदी आईसीयू बेड आरक्षित होने चाहिए। न्यायालय ने यह भी देखा कि प्रतिवादी ने स्वीकार किया है कि दिल्ली में बड़ी संख्या में आईसीयू बेड अभी भी खाली पड़े थे।

दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय

मामले के सभी तथ्यों को जानने के बाद, हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा पारित आदेश “भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत इस देश के नागरिकों को मूलभूत अधिकारों का हनन है
हाईकोर्ट ने 16.10.2020 को होने वाली अगली सुनवाई तक आदेश पर रोक लगा दी है।

Case Details:-

Title:- ASSOCIATION OF HEALTHCARE PROVIDERS INDIA vs Government of NCT of Delhi & Ors.

Case No. W.P. (C) 6756/2020

Date Of Order: 22.09.2020

Quorum:- Justice Naveen Chawla

Advocate:- Counsel for the Petitioner Mr.Maninder Singh, Sr. Adv: Counsel for the Respondents: Mr.Sanjoy Ghose and Mr.Anurag Ahluwalia, 

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