हरिद्वार-ऊना बस में 29 रुपये अधिक किराया वसूलना पड़ा भारी: उपभोक्ता आयोग ने HRTC पर लगाया 50,000 रुपये का जुर्माना

हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की बस में सफर के दौरान एक मुसाफिर से महज 29 रुपये अतिरिक्त किराया वसूलना निगम के लिए खासा महंगा साबित हुआ है। ऊना जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे सेवा में गंभीर लापरवाही और अनुचित व्यापार आचरण करार देते हुए HRTC को पीड़ित यात्री को 50,029 रुपये अदा करने का कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने दो टूक कहा कि कोई भी परिवहन निगम सक्षम प्राधिकारी की लिखित मंजूरी और आधिकारिक रिकॉर्ड के बिना यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त भार नहीं डाल सकता।

आयोग के अध्यक्ष डी. आर. ठाकुर तथा सदस्य मीनाक्षी राणा और अनूप कुमार की पीठ ने 7 सितंबर को यह निर्णय दिया। आयोग ने निगम को निर्देश दिया है कि वह मुसाफिर से वसूले गए अतिरिक्त 29 रुपये तुरंत लौटाए। इसके अलावा, मानसिक प्रताड़ना और परेशानी के एवज में 30,000 रुपये का मुआवजा तथा अदालती खर्च के रूप में 20,000 रुपये की राशि का भुगतान 30 दिनों के भीतर करे।

एक ही दूरी, लेकिन वापसी में कंडक्टर ने वसूले ज्यादा पैसे

यह पूरा विवाद अगस्त 2024 का है। शिकायतकर्ता यात्री 13 अगस्त 2024 को HRTC की बस में ऊना से हरिद्वार के सफर पर निकले थे। 361 किलोमीटर की इस यात्रा के लिए कंडक्टर ने उनसे 488 रुपये किराया लिया। अगले ही दिन, 14 अगस्त को जब वह हरिद्वार से वापस ऊना आने के लिए दोबारा HRTC बस में सवार हुए, तो कंडक्टर ने उसी 361 किलोमीटर के सफर के लिए 517 रुपये मांग लिए।

यात्री ने नकद भुगतान तो कर दिया, लेकिन 29 रुपये के इस अंतर पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने टिकट दिखाते हुए स्पष्ट किया कि एक दिन पहले इसी दूरी के लिए 488 रुपये लिए गए थे। इसके बावजूद कंडक्टर ने निर्धारित से कम पैसे लेने से साफ मना कर दिया। इसके बाद यात्री ने अधिवक्ता सुनील वर्मा के जरिए उपभोक्ता आयोग का रुख किया और सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई।

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टोल बढ़ोतरी का मौखिक आदेश बताकर बचने की कोशिश में था निगम

मामले की सुनवाई के दौरान HRTC की ओर से पेश हुए अधिवक्ता कुलबीर सिंह ने दावा किया कि 13 अगस्त को किराए की सूची में टोल टैक्स की बढ़ी हुई दरें शामिल नहीं हो सकी थीं क्योंकि किराया अपडेट नहीं हुआ था। निगम का कहना था कि 14 अगस्त को 55 रुपये का बढ़ा हुआ टोल जोड़ने के बाद कुल किराया 517 रुपये बना।

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निगम की तरफ से यह दलील भी दी गई कि टिकटिंग मशीनों में बढ़े हुए टोल की दरें दर्ज नहीं हो पाई थीं, इसलिए उच्चाधिकारियों के मौखिक निर्देशों के आधार पर परिचालक यात्रियों से बढ़ी हुई रकम ले रहे थे।

आयोग ने खारिज की दलीलें, एनएचएआई का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला

उपभोक्ता आयोग ने परिवहन निगम के इन तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने अपने अवलोकन में पाया कि HRTC ऐसा कोई आधिकारिक चार्ट, परिपत्र या रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका, जिससे साबित हो कि 14 अगस्त 2024 तक टोल 26 रुपये से बढ़कर 55 रुपये हो चुका था।

आयोग ने रेखांकित किया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का भी ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज पटल पर नहीं रखा गया, जिससे यह पुष्टि हो कि हरिद्वार से ऊना रूट पर एनएचएआई द्वारा टोल बढ़ाया गया था।

साधारण बस पर थोपे गए सुपर लग्जरी के नियम, आरटीआई से भी खुली पोल

मामले की पड़ताल में यह भी सामने आया कि HRTC ने अपने बचाव में जिस प्रशासनिक आदेश का हवाला दिया था, वह ‘सुपर लग्जरी’ बसों से जुड़ा था। दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता ने एक साधारण बस में यात्रा की थी। इस आधार पर आयोग ने माना कि उस परिपत्र के निर्देश इस साधारण बस यात्रा पर लागू ही नहीं होते।

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इसके अलावा, HRTC के अपने ही रिकॉर्ड में बड़ा विरोधाभास उजागर हुआ। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिले एक जवाब में खुलासा हुआ कि वर्ष 2024 के दौरान ऊना से हरिद्वार का आधिकारिक किराया 472 रुपये तय था। इसके विपरीत, निगम ने जाते समय 488 रुपये और वापसी में 517 रुपये वसूल लिए।

बिना वैध आदेश अतिरिक्त किराया वसूलना गैरकानूनी

आयोग ने स्पष्ट किया कि HRTC यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि वापसी यात्रा के लिए टोल में बढ़ोतरी सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित थी।

आयोग ने 7 सितंबर के आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता ने यह भली-भांति सिद्ध कर दिया है कि हरिद्वार से ऊना लौटते वक्त कंडक्टर ने उससे 29 रुपये अधिक वसूले, जो सीधे तौर पर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का मामला है। अतः शिकायतकर्ता इस हर्जाने का पूर्ण हकदार है।

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