भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे कर्मचारी पदोन्नति के हकदार नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने खान एवं भूविज्ञान विभाग के उप निदेशक जी. पापा राव की पदोन्नति याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे किसी भी लोक सेवक को पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इससे विभाग के ईमानदार कर्मचारियों का मनोबल टूटता है।

याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस न्यापति विजय ने कहा कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के संगीन आरोपों में घिरे कर्मचारियों के प्रति एकतरफा सहानुभूति विभाग की कार्यसंस्कृति और नैतिकता को गंभीर नुकसान पहुंचाती है। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे कर्मियों की तुलना बेदाग सेवा रिकॉर्ड वाले कर्मचारियों से नहीं की जा सकती और उनके मामलों को अलग नजरिए से देखा जाना जरूरी है।

हाईकोर्ट ने रेखांकित किया कि पदोन्नति किसी कर्मचारी को विभाग के हितों को सर्वोपरि रखने के बदले मिलने वाला प्रोत्साहन है। यह विभाग और कर्मचारी के बीच का पारस्परिक कर्तव्य है। पदोन्नति का दावा करने के लिए कर्मचारी का सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह साफ और निष्कलंक होना अनिवार्य है। जब तक रिकॉर्ड बेदाग नहीं है, तब तक विभाग उसे पदोन्नत करने के लिए बाध्य नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि गंभीर आरोपों से घिरे व्यक्तियों को पदोन्नति देने से गलत कृत्यों को सामान्य मानने की प्रवृत्ति बढ़ेगी।

आपराधिक मामलों में देरी पदोन्नति का आधार नहीं

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील कविता गोट्टीपति ने दलील दी कि विभागीय वरिष्ठता सूची में दूसरे स्थान पर होने के बावजूद विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) ने 5 मार्च को उनके मुवक्किल की पदोन्नति टाल दी। उन्होंने तर्क दिया कि आपराधिक मुकदमे और विभागीय जांच में हो रही लंबी देरी के आधार पर किसी कर्मचारी की पदोन्नति को अनिश्चितकाल के लिए नहीं रोका जाना चाहिए।

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हाईकोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आपराधिक मुकदमों के निस्तारण में स्वाभाविक रूप से समय लगता है और न्यायिक प्रक्रिया को तुरंत पूरा करने के लिए कोई “जादुई छड़ी” नहीं होती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के निर्दोष होने या न होने का फैसला पदोन्नति से जुड़ी इस रिट याचिका में नहीं, बल्कि मुकदमे की सुनवाई कर रही संबंधित अदालत में ही तय होगा।

124.46 करोड़ रुपये के अवैध खनन का आरोप

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यह मामला साल 2015 का है, जब जी. पापा राव खान एवं भूविज्ञान विभाग (सतर्कता) में सहायक निदेशक के पद पर तैनात थे। उन पर आरोप है कि जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कोनांकी, नादिकुडी और केसनापल्ली गांवों में चूना पत्थर के बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया और फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस दौरान कुल 21,15,825.14 मीट्रिक टन चूना पत्थर का अवैध उत्खनन और परिवहन किया गया, जिससे सरकारी खजाने को 124.46 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ।

सीबीआई जांच और करियर का सफर

मामले की गंभीरता को देखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने सितंबर 2019 में इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी थी। जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने पापा राव समेत 18 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद विजयवाड़ा की विशेष सीबीआई अदालत ने साल 2025 में इस मामले का संज्ञान लिया, जहां फिलहाल मुकदमा लंबित है।

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दूसरी ओर, विभाग द्वारा शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई भी सितंबर 2022 से रुकी हुई है, जब राव ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए अपना लिखित बचाव पत्र सौंपा था।

जी. पापा राव 1992 में तकनीकी सहायक के रूप में विभाग में शामिल हुए थे। इसके बाद वे क्रमिक रूप से पदोन्नत होकर रॉयल्टी इंस्पेक्टर, सहायक भूविज्ञानी, सहायक निदेशक और उप निदेशक के पद तक पहुंचे। वर्तमान में वे संयुक्त निदेशक के पद पर पदोन्नति की मांग कर रहे थे।

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