केरल के कोझिकोड स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एटीएम से नकदी न निकलने के बावजूद खाते से पैसे कटने के मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) को सेवा में कमी का दोषी पाया है। आयोग ने बैंक को पीड़ित ग्राहक के 10,000 रुपये लौटाने और मानसिक प्रताड़ना व असुविधा के एवज में 5,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
अध्यक्ष प्रिया एस और सदस्य वी बालकृष्णन की पीठ ने 27 जुलाई को सुनाए अपने फैसले में कहा कि केवल इलेक्ट्रॉनिक जर्नल (ईजे) रिकॉर्ड्स के आधार पर यह साबित नहीं माना जा सकता कि ग्राहक को वास्तव में नकदी मिल गई थी। आयोग ने बैंक के इस रवैये को अनैतिक व्यापार व्यवहार और सेवा में गंभीर लापरवाही करार दिया।
बिना पैसे निकले खाते से कट गई थी रकम
यह मामला 28 जुलाई 2022 का है, जब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक बचत खाताधारक ने बैंक के एटीएम से 10,000 रुपये निकालने का प्रयास किया। मशीन से पैसे बाहर नहीं आए, लेकिन उनके खाते से 10,000 रुपये डेबिट हो गए। ग्राहक ने तुरंत इसकी सूचना बैंक को दी और 30 जुलाई तथा 12 अगस्त 2022 को स्थानीय शाखा और प्रधान कार्यालय में लिखित शिकायतें दर्ज कराईं।
जब बैंक ने डेबिट की गई रकम वापस करने से इनकार कर दिया, तो ग्राहक ने बैंकिंग लोकपाल और लोक अदालत का रुख किया। हालांकि, दोनों मंचों से कोई राहत न मिलने पर ग्राहक ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की।
बैंक की दलील: इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स में लेन-देन सफल
सुनवाई के दौरान यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अपने बचाव में कहा कि उसकी सेवा में कोई कमी नहीं थी और लेन-देन सफलतापूर्वक पूरा हुआ था। बैंक का दावा था कि इलेक्ट्रॉनिक जर्नल लॉग्स और सुरक्षा कैमरों के रिकॉर्ड्स से यह स्पष्ट है कि नकदी बाहर निकली थी।
बैंक के अनुसार, एटीएम सॉफ्टवेयर की ऐसी कार्यप्रणाली होती है कि यदि नकद बाहर न आए तो डेबिट हुई रकम अपने आप खाते में रिवर्स (क्रेडिट) हो जाती है। चूंकि इस मामले में ऑटो-रिवर्सल दर्ज नहीं हुआ, इसलिए ग्राहक ने पैसे प्राप्त कर लिए थे। बैंक ने अपनी दलील के समर्थन में बैंकिंग लोकपाल और लोक अदालत द्वारा ग्राहक की शिकायतें खारिज किए जाने का भी हवाला दिया।
सीसीटीवी फुटेज न पेश करने पर आयोग का फैसला
उपभोक्ता आयोग ने पाया कि बैंक यह दावा तो करता रहा कि उसके पास सीसीटीवी फुटेज मौजूद है, लेकिन उसने इस महत्वपूर्ण साक्ष्य को आयोग के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया। पीठ ने स्पष्ट किया कि ग्राहक द्वारा वास्तव में नकद प्राप्त करने की पुष्टि के लिए केवल ईजे स्टेटमेंट पर्याप्त सबूत नहीं है।
आयोग ने कहा कि ग्राहक ने अपनी शिकायत के समाधान के लिए तुरंत कदम उठाए थे, लेकिन बैंक ने उसकी समस्या को दूर करने के बजाय अनदेखी की। फैसले में यह सिद्धांत भी रेखांकित किया गया कि जब सीसीटीवी फुटेज जैसा मजबूत सबूत उपलब्ध होने के बावजूद बैंक उसे पेश न करे, तो वे केवल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स के भरोसे विवादित एटीएम लेन-देन को खारिज नहीं कर सकते।

