रामपुर जौहर यूनिवर्सिटी: 38 भवनों के डिमोलिशन नोटिस पर हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, कमिश्नर कोर्ट से मिली राहत बरकरार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर स्थित मौलाना अली जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों को गिराने के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि क्षेत्रीय अपीलीय प्राधिकरण की ओर से ध्वस्तीकरण पर पहले ही अंतरिम रोक (स्टे) लागू है, इसलिए इस मोड़ पर न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ‘मौलाना अली जौहर ट्रस्ट’ के वकील ने सूचित किया कि मुरादाबाद के कमिश्नर (अपीलीय प्राधिकरण) ने मामले में अंतरिम राहत प्रदान कर दी है। इसके बाद हाईकोर्ट की बेंच ने याचिका को निस्तारित करते हुए आगे की कार्यवाही से इंकार कर दिया।

कमिश्नर कोर्ट से मिली अंतरिम राहत

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मुरादाबाद के मंडलायुक्त की अदालत ने सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए यूनिवर्सिटी परिसर में स्थित 38 भवनों के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर अंतिम फैसला आने तक रोक लगा दी थी। कमिश्नर कोर्ट अब 3 अगस्त को इस अपील पर अगली सुनवाई करेगी।

15 जुलाई को आरडीए ने दिया था नोटिस

मामले की शुरुआत 15 जुलाई को हुई थी, जब रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को 15 दिनों के भीतर परिसर की 40 में से 38 इमारतों को खुद ढहाने का निर्देश दिया था। इसके लिए 30 जुलाई की समयसीमा तय की गई थी। स्थानीय प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि इन भवनों का निर्माण स्वीकृत लेआउट प्लान के बिना किया गया है।

छात्रों का प्रदर्शन फिलहाल स्थगित

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान द्वारा स्थापित इस यूनिवर्सिटी के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश आने के बाद छात्रों और स्थानीय समर्थकों ने परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। हालांकि, अपीलीय प्राधिकरण द्वारा अंतरिम स्टे दिए जाने के बाद छात्र प्रदर्शनकारियों ने अपने आंदोलन को फिलहाल अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है।

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