मेडिकल इमरजेंसी में ट्रिप रद्द होने पर मेकमायट्रिप को एडवांस और मुआवजा लौटाने का आदेश

कर्नाटक राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी मेकमायट्रिप इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए कंपनी को एक ग्राहक को 76,000 रुपये का एडवांस ब्याज समेत लौटाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही आयोग ने बेंगलुरु निवासी पीड़ित उपभोक्ता को 10,000 रुपये का मुआवजा और कानूनी खर्च देने का आदेश सुनाया है। यह मामला बेटे के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण सिंगापुर का पारिवारिक दौरा रद्द होने से जुड़ा है।

एडवांस मिलने के बाद भी नहीं हुई थी कोई बुकिंग

न्यायिक सदस्य रवि शंकर और सदस्य सुनीता सी बागेवाड़ी की पीठ ने 27 जुलाई को दिए अपने फैसले में बेंगलुरु जिला उपभोक्ता आयोग के 3 अप्रैल 2019 के आदेश को सही ठहराया। राज्य आयोग ने स्पष्ट किया कि ग्राहक द्वारा यात्रा रद्द करने का कारण पूरी तरह से प्रामाणिक और जायज था।

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आयोग ने पाया कि मेकमायट्रिप को जुलाई में 76,000 रुपये की अग्रिम राशि मिल चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी कंपनी ने न तो हवाई टिकट खरीदे थे और न ही पैकेज से जुड़ी कोई अन्य बुकिंग की थी। चूंकि ट्रैवल एजेंसी ने कोई वित्तीय प्रतिबद्धता या बुकिंग नहीं की थी, इसलिए वह पूरी अग्रिम राशि वापस करने के लिए बाध्य है।

क्या है पूरा विवाद

यह मामला वर्ष 2017 का है, जब पीड़ित ग्राहक ने अपने परिवार के चार सदस्यों के लिए 27 सितंबर से 3 अक्टूबर 2017 के बीच प्रस्तावित सिंगापुर टूर पैकेज के लिए 8 जुलाई 2017 को 76,000 रुपये जमा किए थे। पूरे पैकेज की कुल कीमत 2,90,808 रुपये थी।

शेष भुगतान करने से पहले ही, 1 सितंबर 2017 को ग्राहक के बेटे के साथ एक हादसा हो गया। इस अनहोनी के कारण परिवार के लिए यात्रा करना असंभव हो गया, जिसके बाद ग्राहक ने बुकिंग रद्द करने और एडवांस राशि वापस मांगी। हालांकि, मेकमायट्रिप ने पूरी रकम लौटाने से इनकार कर दिया और कुल पैकेज लागत का 20 प्रतिशत हिस्सा काट लिया। इसके खिलाफ ग्राहक ने सेवाओं में कमी का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता मंच का रुख किया।

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जिला आयोग का फैसला बरकरार

जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मेकमायट्रिप को शिकायत दर्ज होने की तिथि से राशि की पूर्ण वसूली तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 76,000 रुपये लौटाने का आदेश दिया था। इसके अलावा 5,000 रुपये का मुआवजा और 5,000 रुपये कानूनी खर्च के रूप में मंजूर किए गए थे।

मेकमायट्रिप ने इस फैसले के खिलाफ राज्य आयोग में अपील दायर की थी। राज्य आयोग ने निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी या प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं पाई और अपील को खारिज कर दिया। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि अपील प्रक्रिया के दौरान जमा की गई राशि को जिला आयोग में स्थानांतरित किया जाए ताकि उसे पीड़ित उपभोक्ता को सौंपा जा सके।

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