कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग से संबंधित नियम किसी पक्षकार को सुनवाई की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की कॉपी प्राप्त करने का अधिकार नहीं देते, जब तक कि कोर्ट विशेष रूप से ऐसा आदेश न दे।
जस्टिस सी.एम. पूनाचा ने एक रिट याचिका खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया। याचिकाकर्ता ने एक रिट अपील की सुनवाई की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने से हाईकोर्ट रजिस्ट्री के इनकार को चुनौती दी थी।
क्या था मामला?
करीब 72 वर्षीय ए. सत्यनारायण स्वामी ने रिट अपील संख्या 929/2025 से संबंधित अदालती कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की कॉपी प्राप्त करने के लिए निर्धारित फॉर्म III में आवेदन किया था।
हाईकोर्ट के असिस्टेंट रजिस्ट्रार (सूचना प्रौद्योगिकी) ने 23 जुलाई 2026 को कर्नाटक रूल्स ऑन लाइव स्ट्रीमिंग एंड रिकॉर्डिंग ऑफ कोर्ट प्रोसीडिंग्स, 2021 के नियम 10(1)(ii) का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिया।
रजिस्ट्री ने कहा कि रिकॉर्डिंग के रूप में सुरक्षित रखे गए अभिलेख (Archival Data) अपने आप अदालत की आधिकारिक कार्यवाही का रिकॉर्ड नहीं बन जाते। इसके लिए संबंधित बेंच का स्पष्ट निर्देश आवश्यक है। इसलिए मांगी गई रिकॉर्डिंग को संबंधित उद्देश्य के लिए उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।
इस फैसले से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने रजिस्ट्री का आदेश रद्द करने और रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की।
इसके अलावा, उन्होंने नियम 8(3) के तहत अधिकारों के इस्तेमाल के लिए दिशानिर्देश या मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर प्रकाशित करने की मांग भी की।
याचिकाकर्ता चाहते थे कि इन दिशानिर्देशों में रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने या इनकार करने के आधार, कारण सहित आदेश देने की व्यवस्था, फॉर्म III में दाखिल आवेदनों के निस्तारण की समयसीमा और आंतरिक समीक्षा की प्रक्रिया शामिल हो।
याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट गिरीश हेगड़े ने नियम 8 का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि इस नियम के अनुसार, जिन रिकॉर्डिंग को अपलोड नहीं किया गया है, उनकी कॉपी उपलब्ध कराने की अनुमति नामित अधिकारी (Designated Officer) दे सकता है। इसके लिए फॉर्म III में आवेदन करने का प्रावधान है।
उनकी दलील थी कि याचिकाकर्ता ने नियम 8(3) के अनुसार निर्धारित फॉर्म में आवेदन किया था। इसलिए आवेदन खारिज करना गलत था और मांगी गई रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी।
लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के नियमों पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने पाया कि रजिस्ट्री ने नियम 10(1)(ii) के आधार पर आवेदन खारिज किया था।
इस नियम में स्पष्ट रूप से कहा गया है,
“रिकॉर्डिंग के रूप में सुरक्षित रखे गए अभिलेख अदालत की कार्यवाही का आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं माने जाएंगे, जब तक कि बेंच इसके विपरीत निर्देश न दे।”
जस्टिस पूनाचा ने नियम 10(2) का भी उल्लेख किया, जिसमें अदालत की रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के इस्तेमाल पर प्रतिबंध और शर्तें निर्धारित की गई हैं।
इस प्रावधान के अनुसार, अधिकृत व्यक्तियों या संस्थाओं के अलावा कोई अन्य व्यक्ति या संस्था लाइव स्ट्रीम की गई अदालती कार्यवाही या सुरक्षित रिकॉर्डिंग को रिकॉर्ड, साझा या प्रसारित नहीं कर सकती।
नियम में यह भी प्रावधान है कि अदालत अधिकृत रिकॉर्डिंग को उसके मूल स्वरूप में इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकती है। इनमें समाचारों के प्रसार, प्रशिक्षण, शैक्षणिक और शिक्षा संबंधी उद्देश्य शामिल हैं।
विशेष न्यायिक आदेश के बिना रिकॉर्डिंग की कॉपी मांगने का अधिकार नहीं
नियम 8 और नियम 10 को एक साथ पढ़ते हुए हाईकोर्ट ने कहा,
“नियमों के नियम 8 और नियम 10 को संयुक्त रूप से पढ़ने से यह स्पष्ट है कि ये किसी भी तरह से याचिकाकर्ता को उक्त रिकॉर्डिंग की कॉपी मांगने का अधिकार नहीं देते, जब तक कि कोर्ट विशेष रूप से ऐसा आदेश न दे।”
कोर्ट ने आगे कहा,
“जब याचिकाकर्ता को ऐसा कोई अधिकार प्राप्त ही नहीं है, तो रिकॉर्डिंग की कॉपी देने के उनके अनुरोध को खारिज किए जाने को चुनौती देने का प्रश्न ही नहीं उठता।”
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
इन निष्कर्षों के आधार पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने पाया कि याचिका में कोई दम नहीं है।
जस्टिस सी.एम. पूनाचा ने प्रारंभिक सुनवाई के चरण में ही रिट याचिका खारिज कर दी।
केस डिटेल्स
केस टाइटल: ए. सत्यनारायण स्वामी बनाम कर्नाटक हाईकोर्ट एवं अन्य
केस नंबर: रिट याचिका संख्या 28070/2026 (GM-RES)
बेंच: जस्टिस सी.एम. पूनाचा
