इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में मतदान प्रक्रिया की लगातार वीडियोग्राफी कराने की मांग वाली याचिका का निस्तारण कर दिया है। भारत निर्वाचन आयोग ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि मतदान की वीडियोग्राफी रिटर्निंग ऑफिसरों के लिए जारी हैंडबुक में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार कराई जाएगी।
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की डिवीजन बेंच ने 22 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग की ओर से दिए गए बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निस्तारण किया।
क्या था मामला?
याचिकाकर्ता शैलेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा 9 अक्टूबर 2026 को जारी फॉर्म 7B में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम क्रम संख्या 13 पर दर्ज है।
शैलेंद्र सिंह ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनकी मुख्य मांग थी कि मतदान के दिन सभी मतदान केंद्रों के भीतर होने वाली पूरी प्रक्रिया की लगातार और बिना किसी रुकावट के वीडियोग्राफी कराई जाए।
सभी मतदान केंद्रों पर लगातार वीडियोग्राफी की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने अधिवक्ता अमित कुमार सिंह भदौरिया और रितिका सिंह के साथ पक्ष रखा।
उन्होंने कोर्ट से मांग की कि मतदान के दिन सभी मतदान केंद्रों के भीतर होने वाली कार्यवाही की लगातार और निर्बाध वीडियोग्राफी सुनिश्चित की जाए। साथ ही, इसकी निगरानी ऐसे अधिकारी को सौंपी जाए जिसे इसके लिए जवाबदेह ठहराया जा सके।
याचिकाकर्ता ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा फरवरी 2016 में राज्यसभा और राज्य विधान परिषद चुनावों के लिए जारी रिटर्निंग ऑफिसरों की हैंडबुक के पैराग्राफ 49 का हवाला दिया। कोर्ट को बताया गया कि हैंडबुक के अध्याय 9 के पैराग्राफ 14 में भी वीडियोग्राफी की विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
चुनाव आयोग ने कोर्ट को दिया आश्वासन
भारत निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ओ.पी. श्रीवास्तव ने अधिवक्ता अनुप्रिया श्रीवास्तव के साथ पक्ष रखा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी से प्राप्त निर्देशों के आधार पर उन्होंने सुनवाई की शुरुआत में ही कोर्ट को बताया कि हैंडबुक के पैराग्राफ 49 का पालन सुनिश्चित करने के लिए पहले ही प्रावधान किया जा चुका है।
उन्होंने कहा, “उक्त हैंडबुक के पैराग्राफ 49 का पालन करने के लिए पहले ही प्रावधान किया जा चुका है और वीडियोग्राफी उसी हैंडबुक में दिए गए प्रावधानों के अनुसार कराई जाएगी।”
चुनाव आयोग के इस बयान के बाद याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने कहा कि हैंडबुक में निर्धारित वीडियोग्राफी संबंधी प्रावधानों का पालन किए जाने के आश्वासन से उनके मुवक्किल की शिकायत का समाधान हो गया है।
हाईकोर्ट ने याचिका का किया निस्तारण
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और चुनाव आयोग का बयान दर्ज करने के बाद डिवीजन बेंच ने कहा,
“तदनुसार, इस कोर्ट के समक्ष प्रतिवादियों की ओर से दिए गए बयान के अनुसार रिट याचिका का निस्तारण किया जाता है।”
कोर्ट ने सुनवाई के दिन दाखिल पूरक हलफनामे और लिखित निर्देशों को भी रिकॉर्ड पर ले लिया।
केस डिटेल्स
केस टाइटल: शैलेंद्र सिंह बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य
केस नंबर: रिट-सी संख्या 11746/2026
बेंच: जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी
फैसले की तारीख: 22 अक्टूबर 2026
