मिलावटी मसूर दाल मामले में ओडिशा हाईकोर्ट का फैसला: 1997 के मामले में दुकानदार की जेल की सजा रद्द, 500 रुपये का जुर्माना

ओडिशा हाईकोर्ट ने एक किराना दुकान में मिलावटी मसूर दाल बेचने के मामले में दुकानदार की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है, लेकिन उसकी छह महीने की जेल की सजा को रद्द करते हुए उसे 500 रुपये के जुर्माने में बदल दिया है। अदालत ने यह निर्णय इस बात पर ध्यान देते हुए सुनाया कि यह घटना लगभग तीन दशक पहले की है।

हाईकोर्ट का आदेश और शर्तें

जस्टिस वी नरसिंह की पीठ ने 28 जुलाई को जारी अपने आदेश में कहा कि मामले के रिकॉर्ड, आरोपों की प्रकृति और दलीलों को ध्यान में रखते हुए जेल की सजा को जुर्माने में बदलना ही न्याय के हित में होगा। हाईकोर्ट ने आरोपी दुकानदार को दो महीने के भीतर 500 रुपये का जुर्माना ट्रायल कोर्ट में जमा कराने का निर्देश दिया है। समय सीमा के भीतर जुर्माना न भरने की स्थिति में आरोपी को तीन दिन की जेल काटनी होगी।

READ ALSO  "जमानत याचिकाओं पर लंबी तारीखें मिलना बेहद निराशाजनक": सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से मांगी लंबित मामलों की रिपोर्ट, रोस्टर बदलने के दिए संकेत

अदालत में वकीलों की दलीलें

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ, जिसके बाद हाईकोर्ट ने अधिवक्ता पी एस मोहंती को न्याय मित्र (अमिकस क्यूरी) नियुक्त किया। न्याय मित्र ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि निचली अदालत ने साक्ष्यों का सही से मूल्यांकन नहीं किया था, लेकिन उन्होंने आग्रह किया कि कारावास की सजा को जुर्माने में बदलना न्यायसंगत होगा। वहीं, लोक अभियोजक एस पाणिग्राही ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष ने आरोप को बिना किसी संदेह के साबित किया है, इसलिए अदालत के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।

जस्टिस नरसिंह ने पाया कि निचली अदालतों ने सबूतों का सही आकलन किया था और दोषसिद्धि को रद्द करने का कोई आधार नहीं है। हालांकि, घटना के साल 1997 की होने और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने सजा बदलने के सुझाव को स्वीकार कर लिया।

1997 में ऐसे हुई थी जांच

यह मामला 6 दिसंबर 1997 का है, जब सुंदरगढ़ जिले के तत्कालीन खाद्य निरीक्षक और एक खाद्य चपरासी ने शाम करीब 4:30 बजे दुकानदार की किराना दुकान का निरीक्षण किया था। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद निरीक्षक ने नोटिस जारी किया और 40.50 रुपये का भुगतान करके 750 ग्राम मसूर दाल और 450 ग्राम जीरा खरीदा।

निरीक्षक ने दुकानदार की मौजूदगी में नमूनों को तीन बराबर, सीलबंद और लेबल वाले हिस्सों में बांटा। इनमें से दो सीलबंद नमूने पब्लिक एनालिस्ट के पास भेजे गए और एक नमूना सुंदरगढ़ स्थित कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन को भेजा गया।

READ ALSO  पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने कथित अनैतिक कानूनी प्रथाओं पर शीर्ष बैंक अध्यक्षों को तलब किया

निचली अदालत का फैसला और लैब रिपोर्ट

पब्लिक एनालिस्ट की रिपोर्ट में जीरा शुद्ध पाया गया, लेकिन मसूर दाल में खेसारी दाल की मिलावट पाई गई। दुकानदार ने इस परिणाम को चुनौती दी, लेकिन मैसूर स्थित सेंट्रल फूड लेबोरेटरी ने भी मिलावट की पुष्टि कर दी।

इसके बाद 17 अप्रैल 2000 को ट्रायल कोर्ट ने दुकानदार को खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम के तहत मिलावटी भोजन बेचने का दोषी पाया और उसे छह महीने की कैद के साथ 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इस फैसले की पुष्टि बाद में 25 सितंबर 2002 को जिला एवं सत्र न्यायालय ने भी की थी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles