केरल हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में 55 वर्षीय व्यक्ति की मौत के मामले में एक अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के खिलाफ केस दर्ज करने की पुलिस को अनुमति दे दी है। हादसे के समय जज का नाबालिग बेटा कथित तौर पर कार चला रहा था। यह दुर्घटना चेरानल्लूर के पास हुई थी, जिसमें दोपहिया वाहन सवार जयबालकृष्णन की मौके पर ही मौत हो गई थी।
पुलिस ने जज के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए हाईकोर्ट से अनुमति मांगी थी। सूत्रों के मुताबिक, हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर को प्रशासनिक स्तर पर इसकी मंजूरी दी।
हादसे में शामिल मर्सिडीज-बेंज कार जज के नाम पर रजिस्टर्ड है। उनके नाबालिग बेटे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है।
नाबालिग को दोबारा हिरासत में लिया गया, फिर मिली जमानत
पुलिस ने शुरुआत में नाबालिग के खिलाफ BNS की धारा 106 के तहत लापरवाही से मौत का कारण बनने का मामला दर्ज किया था। इसके बाद किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के तहत उसे जमानत पर छोड़ दिया गया।
हालांकि, उसकी रिहाई के बाद मृतक के परिवार ने चेरानल्लूर पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस ने नाबालिग को दोबारा हिरासत में लिया और उसके खिलाफ BNS की धारा 105 भी लगाई।
नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया, जहां से उसे फिर जमानत मिल गई।
खाने का स्टॉल बंद कर घर लौट रहे थे जयबालकृष्णन
यह हादसा 25 अक्टूबर को रात करीब 2 से 3 बजे के बीच हुआ था। जयबालकृष्णन अपना खाने का स्टॉल बंद करने के बाद दोपहिया वाहन से घर लौट रहे थे।
पुलिस के मुताबिक, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नाम पर रजिस्टर्ड मर्सिडीज-बेंज कार उनका नाबालिग बेटा कथित तौर पर तेज रफ्तार में चला रहा था। इसी दौरान कार ने जयबालकृष्णन के दोपहिया वाहन को पीछे से टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी गंभीर थी कि 55 वर्षीय जयबालकृष्णन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
मृतक की बेटी ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
जयबालकृष्णन की बेटी ने मामले में पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया है कि आरोपी के जज का बेटा होने के कारण पुलिस ने उसके साथ विशेष व्यवहार किया।
26 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है और वह अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए लड़ाई जारी रखेंगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जज या उनके नाबालिग बेटे को अपने पिता की मौत की जिम्मेदारी से बचने नहीं देंगी।
मृतक की बेटी ने नाबालिगों से जुड़े गंभीर अपराधों के मामलों को लेकर भी चिंता जताई। उनका आरोप था कि ऐसी घटनाओं को सामान्य माना जाने लगा है और गंभीर अपराधों में शामिल नाबालिगों को केवल उनकी उम्र के आधार पर कानूनी कार्रवाई से बच निकलने दिया जा रहा है।
