सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने पर 14 राज्यों की सहमति को संतोषजनक बताया है। हालांकि, कोर्ट ने रिटायर होने वाले या हाल ही में रिटायर हुए न्यायिक अधिकारियों की अलग-अलग याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट और राज्य सरकारों के बीच बातचीत के जरिए सुलझाया जा रहा है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों की व्यक्तिगत याचिकाओं पर अलग से सुनवाई करना उचित नहीं होगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि अब तक 14 राज्य रिटायरमेंट उम्र बढ़ाकर 62 साल करने पर सहमत हो चुके हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि बाकी राज्य भी जल्द इस दिशा में कदम उठाएंगे।
बेंच ने स्पष्ट किया कि मुख्य याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, लेकिन न्यायिक अधिकारियों की अलग-अलग अर्जियों पर तत्काल सुनवाई नहीं की जाएगी।
सीनियर एडवोकेट रंजीत कुमार ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारी हर दिन 60 साल की उम्र पूरी करने के बाद रिटायर हो रहे हैं।
सात राज्यों को रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 4 सितंबर को राज्यों को जिला न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने इस संबंध में सहमति देने वाले सात राज्यों छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लिए विशेष निर्देश जारी किए थे।
आदेश के अनुसार, इन राज्यों में 31 मार्च 2026 या उसके बाद रिटायर हुए न्यायिक अधिकारियों को दोबारा न्यायिक सेवा में शामिल होने का विकल्प दिया जाएगा, बशर्ते उन्होंने रिटायरमेंट के बाद कोई दूसरी नौकरी न की हो।
सुप्रीम कोर्ट ने इन राज्यों को न्यायिक सेवा नियमों में संशोधन करके रिटायरमेंट उम्र 62 साल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर दो महीने के भीतर पूरी की जाए।
हालांकि, सेवा विस्तार संबंधित हाईकोर्ट द्वारा न्यायिक अधिकारी की योग्यता और कार्यप्रदर्शन के आकलन पर निर्भर करेगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि नियमों में संशोधन होने तक इन सात राज्यों में 60 साल की उम्र पूरी करने वाले न्यायिक अधिकारियों को 62 साल तक सेवा जारी रखने की अनुमति होगी, बशर्ते संबंधित हाईकोर्ट उन्हें इसके लिए उपयुक्त पाए।
अन्य राज्यों को फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश को भी न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के मुद्दे पर अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था।
इनके अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी को भी इस संबंध में पुनर्विचार करने को कहा गया था।
इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्य सरकारें वित्तीय बोझ का हवाला देकर न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का विरोध नहीं कर सकतीं।
देशभर में एक समान रिटायरमेंट उम्र तय करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट देशभर के जिला न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र एक समान 62 साल करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं, जबकि हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र 62 साल है।
यह मुद्दा लंबे समय से विचाराधीन है। वर्ष 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस के. जगन्नाथ शेट्टी आयोग की उस सिफारिश को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिसमें जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाकर 62 साल करने का प्रस्ताव दिया गया था।
इसके बाद तेलंगाना और मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों ने न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट देशभर में जिला न्यायपालिका के अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र एक समान करने के मुद्दे पर विचार कर रहा है।
