कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ की जांच के लिए हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन करे। इस हादसे में 19 लोगों की जान चली गई थी।
मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के उस अनुरोध को खारिज कर दिया, जिसमें वर्तमान न्यायाधीश से जांच कराने की मांग की गई थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत किसी मौजूदा न्यायाधीश को जांच आयोग का प्रमुख नियुक्त नहीं किया जा सकता।
जांच आयोग का दायरा और जिम्मेदारियां
हाईकोर्ट ने अपने निर्देश में कहा कि राज्य सरकार इस आयोग की अगुवाई के लिए हाईकोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश का चयन कर सकती है। यह आयोग भगदड़ के कारणों का पता लगाएगा और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा।
इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि इस हादसे की जांच के लिए गठित होने वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) की कमान हाईकोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश को सौंपी जाएगी।
नवमी पर विशेष अवकाशकालीन सुनवाई
दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान नवमी के दिन बैठी अवकाशकालीन पीठ ने एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह विशेष सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने पूजा के पहले दिन यानी सप्तमी को हुई इस दुखद घटना की निष्पक्ष और त्वरित जांच कराने की गुहार लगाई थी।
