गलती से ज्यादा मिली पेंशन नहीं रख सकते रिटायर कर्मचारी: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

कोषागार विभाग की लापरवाही के कारण अधिक भुगतान की गई पेंशन राशि को सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने पास नहीं रख सकता। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट करते हुए पूर्व सरकारी अधिकारी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने पेंशन से अतिरिक्त रकम की वसूली रोके जाने की गुहार लगाई थी।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि भले ही अतिरिक्त भुगतान प्रशासनिक चूक के कारण हुआ था, लेकिन याचिकाकर्ता इस बात से भली-भांति अवगत थे कि एकमुश्त कम्यूटेशन राशि प्राप्त करने के बावजूद उनकी मासिक पेंशन से तय कटौती नहीं की जा रही थी।

आठ साल बाद ऑडिट में हुआ खुलासा

मामला टिहरी गढ़वाल में तैनात रहे एक पूर्व क्षेत्र अधिकारी (सर्कल ऑफिसर) से जुड़ा है, जो 31 जुलाई 2017 को सेवानिवृत्त हुए थे। अक्टूबर 2017 में उन्हें कम्यूटेशन के एवज में 18.99 लाख रुपये की एकमुश्त राशि का भुगतान किया गया था। पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) के तहत नवंबर 2017 से उनकी मासिक पेंशन से 19,320 रुपये की कटौती की जानी थी।

हालांकि, कोषागार विभाग की चूक की वजह से लगभग आठ वर्षों तक यह कटौती लागू ही नहीं की जा सकी, जिससे सेवानिवृत्त अधिकारी को लगातार पूरी पेंशन मिलती रही। हाल ही में हुए एक आधिकारिक ऑडिट के दौरान इस लापरवाही का पता चला, जिसके बाद विभाग ने अत्यधिक भुगतान की गई राशि की वसूली शुरू की।

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अदालत में दिए गए तर्क और वित्तीय प्रभाव

विभाग की कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह ओवरपेमेंट पूरी तरह से विभागीय गलती का नतीजा था। उन्होंने दलील दी कि नियमित कम्यूटेशन कटौती के साथ 20,000 रुपये प्रति माह की अतिरिक्त वसूली लगाने से रिटायर्ड अधिकारी के सामने भारी आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।

राज्य सरकार के वकील ने वसूली की प्रक्रिया का बचाव करते हुए अदालत को बताया कि अधिक दी गई राशि पर कोई ब्याज नहीं लगाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 20,000 रुपये की मासिक कटौती के बावजूद याचिकाकर्ता को हर महीने 37,310 रुपये की शुद्ध पेंशन मिल रही है।

वसूली की दर को हाईकोर्ट ने माना सही

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खंडपीठ ने याचिका को निरस्त करते हुए निर्णय दिया कि एकमुश्त कम्यूटेशन का लाभ उठाने के बाद अतिरिक्त पेंशन राशि अपने पास बनाए रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता। अदालत ने कहा कि विभाग की प्रशासनिक भूल से अधिक प्राप्त राशि को लौटाने का दायित्व खत्म नहीं होता।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने 20,000 रुपये प्रति माह की वर्तमान वसूली दर को जारी रखने की अनुमति दे दी। पीठ ने टिप्पणी की कि इस दर से कटौती होने के बाद भी सरकार को पूरी रकम वसूलने में कई सालों का समय लगेगा।

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