सम्मान कैपिटल मामला: जांच में ढिलाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सीबीआई और दिल्ली पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश

सम्मान कैपिटल लिमिटेड (पूर्व में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड) के प्रवर्तकों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को कड़ी फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने जांच एजेंसियों की निष्क्रियता पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों प्रमुखों को तलब करने की चेतावनी दी। हालांकि, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस. वी. राजू द्वारा जल्द स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आश्वासन के बाद कोर्ट ने समन जारी करने का फैसला फिलहाल टाल दिया।

जांच में सुस्ती और आरोपियों पर उठे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई द्वारा इस साल जनवरी में हलफनामा दायर किए जाने के बाद से मामले की प्रगति को लेकर कोई नया रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया है। याचिका में मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग की गई है। भूषण ने पीठ को यह भी सूचित किया कि मामले के मुख्य आरोपियों में से एक समीर गहलोत अब लंदन चले गए हैं।

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वहीं, कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए. एम. सिंघवी ने कहा कि समीर गहलोत का अब सम्मान कैपिटल से कोई संबंध नहीं है।

पीठ, जिसमें जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे, ने जनवरी से जुलाई के अंत तक जांच में कोई प्रगति न होने पर गहरी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एजेंसियों की चुप्पी को “चौंकाने वाला” करार दिया। उन्होंने कहा कि फंड की हेराफेरी, पैसों के गोलमाल (राउंड-ट्रिपिंग) और कंपनी अधिनियम के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद जांच में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

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एजेंसी का पक्ष और कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जांच एजेंसियों की ओर से पेश एएसजी एस. वी. राजू ने पीठ को बताया कि गंभीर कपट अन्वेषण कार्यालय (एसएफआईओ) भी मामले की जांच कर रहा है और कई गवाहों से पूछताछ की गई है। उन्होंने तर्क दिया कि अधिकारी फिलहाल इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि ब्याज सहित कर्ज चुका दिए जाने के बाद क्या कोई आपराधिक मामला बनता है।

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इस पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि महीनों की जांच के बाद भी जांच एजेंसियों को यह कैसे नहीं पता कि कोई अपराध हुआ है या नहीं। चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि यदि कर्ज की वापसी के आधार पर कोई अपराध नहीं बनता है, तो एजेंसियों में यह बात स्पष्ट रूप से कहने का साहस होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी है और कहा है कि अगली सुनवाई सीबीआई और ईओडब्ल्यू द्वारा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद की जाएगी।

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