इंदौर के भागीरथपुरा में हुए भीषण जल प्रदूषण कांड के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मध्य प्रदेश में सुरक्षित पेयजल आपूर्ति और पानी की गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने राज्य में पेयजल मानकों के पालन और संबंधित उपायों पर जवाब तलब किया है। पिछले साल दिसंबर में भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 22 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए थे।
भोपाल स्थित एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने इंदौर और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में पेयजल आपूर्ति और प्रदूषण से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह कदम उठाया। न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मामले की कार्यवाही आगे बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) द्वारा दाखिल रिपोर्ट को विरोधी पक्षों को ईमेल के जरिए भेजने का निर्देश दिया। पीठ ने सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।
पूरे प्रदेश के जल संकट पर सुनवाई
सुनवाई के दौरान याचिकर्ताओं के वकील ने पीठ के समक्ष स्पष्ट किया कि भले ही हाईकोर्ट की इंदौर बेंच स्थानीय पेयजल आपूर्ति से जुड़ी याचिकाओं पर विचार कर रही है, लेकिन एनजीटी के सामने लाई गई अर्जियों में पूरे मध्य प्रदेश के जल संकट और दूषित पानी की गंभीर स्थिति को उठाया गया है।
हाईकोर्ट के निर्देशों और न्यायिक आयोग पर नजर
एनजीटी ने ध्यान दिलाया कि भागीरथपुरा हादसे में प्राथमिक रूप से जिम्मेदार अधिकारियों का निर्धारण करने के लिए हाईकोर्ट ने पहले ही एक न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है। इसके साथ ही, हाईकोर्ट नगर निगम क्षेत्र में जलापूर्ति में सुधार के लिए व्यापक दिशा-निर्देश दे चुका है।
इन अदालती निर्देशों में नियमित रूप से पानी की जांच, पर्याप्त क्लोरीन स्तर बनाए रखने, जर्जर पाइपलाइनों को बदलने, पानी की टंकियों की सफाई व रोगाणुमुक्त करने, सीवेज रिसाव के बिंदुओं की पहचान करने, सीवरेज नेटवर्क को मजबूत करने और लापरवाह अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने जैसे उपाय शामिल हैं। ट्रिब्यूनल ने माना कि स्थानीय आपूर्ति से जुड़े ये मुद्दे फिलहाल हाईकोर्ट और उसके न्यायिक आयोग के विचारधीन हैं।
अगली सुनवाई 16 सितंबर को
ट्रिब्यूनल ने सभी पक्षों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर अपने सुझाव और आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए तीन हफ्ते की मोहलत दी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 16 सितंबर को तय की गई है।

