हाईवे पर अवैध पार्किंग और अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एनएचएआई से टोल प्लाजा पर कैमरा निगरानी प्रणाली लगाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर खड़े अनधिकृत वाहनों और अवैध अतिक्रमण को गंभीर खतरा बताते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से सवाल किया कि वह टोल प्लाजा पर कैमरा निगरानी प्रणाली और मॉनिटरिंग रूम स्थापित क्यों नहीं कर सकता।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राजस्थान के फलौदी में हुए एक भीषण सड़क हादसे पर दर्ज स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। उस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि राजमार्गों पर बेतरतीब खड़े वाहन और अतिक्रमण हादसों की दो सबसे बड़ी वजहें हैं।

एनएचएआई की गश्त दलील पर कोर्ट ने उठाया तकनीकी निगरानी का मुद्दा

सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि राजमार्गों पर अनधिकृत पार्किंग की जांच के लिए नियमित निरीक्षण और गश्त के सर्कुलर जारी किए जा चुके हैं। इस पर पीठ ने प्राधिकरण से पूछा कि वह आधुनिक कैमरा निगरानी व्यवस्था के बारे में क्यों नहीं सोचता, जिसके तहत सभी टोल प्लाजा पर विशेष मॉनिटरिंग रूम बनाकर सीधी नजर रखी जा सके।

मामले में अदालत की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता एएनएस नाडकर्णी ने भी पीठ के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राजमार्गों पर वाहनों की अवैध पार्किंग एक अत्यंत गंभीर समस्या है, जिसके कारण अक्सर जानलेवा सड़क दुर्घटनाएं होती हैं।

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हलफनामा दाखिल न करने पर नाराजगी, केंद्र और तमिलनाडु को दो हफ्ते की मोहलत

पीठ ने इस बात पर असंतोष जताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, गृह मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार ने मामले में अब तक अपने अनुपालन हलफनामे पेश नहीं किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों केंद्रीय मंत्रालयों को हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया। साथ ही तमिलनाडु सरकार को भी निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब रिकॉर्ड पर रखे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर तय की है।

फलौदी हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया था संज्ञान

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शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष नवंबर में इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। यह कदम 2 नवंबर को राजस्थान के फलौदी जिले में हुए एक हादसे के बाद उठाया गया था, जब बीकानेर के कोलायत मंदिर से जोधपुर जा रहा एक टेंपो ट्रैवलर भारतमाला हाईवे पर मतोड़ा गांव के पास सड़क किनारे खड़े एक ट्रेलर ट्रक से टकरा गया था। इस दर्दनाक टक्कर में 15 यात्रियों की मौत हो गई थी।

शोल्डर पर भारी वाहनों के रुकने और नए ढाबों पर पहले से है रोक

इससे पहले इसी मामले में 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने कई अंतरिम निर्देश जारी किए थे। अदालत ने निर्देश दिया था कि कोई भी भारी या व्यावसायिक वाहन किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग के मुख्य मार्ग (कैरिजवे) या पक्के शोल्डर पर नहीं रुकेगा और न ही वहां पार्क होगा। ऐसे वाहनों को केवल तय पार्किंग-बे, ले-बाई या वे-साइड एमेनिटीज जैसी निर्धारित जगहों पर ही रुकने की अनुमति दी गई थी।

इसके अलावा, कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे के दायरे में किसी भी नए ढाबे, भोजनालय या व्यावसायिक निर्माण पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। साथ ही सड़क परिवहन मंत्रालय और एनएचएआई को निर्देश दिया गया था कि वे खतरनाक ब्लैकस्पॉट और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर राष्ट्रीय राजमार्गों के ब्लैकस्पॉट की एक विस्तृत सूची सार्वजनिक करें।

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अंतरिम आदेश देते हुए पीठ ने रेखांकित किया था कि देश के कुल सड़क नेटवर्क में राष्ट्रीय राजमार्गों की हिस्सेदारी महज 2 प्रतिशत है, लेकिन सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं मार्गों पर होता है। पीठ ने सख्त चेतावनी दी थी कि प्रशासनिक सुस्ती या बुनियादी ढांचे की खामियों के चलते किसी भी सड़क, खासकर हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे को मौत के रास्ते में तब्दील नहीं होने दिया जा सकता।

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