मथुरा कृष्ण जन्मभूमि विवाद: हिंदू पक्षों में मुख्य याचिका पर आपसी बातचीत शुरू, सुप्रीम कोर्ट ने टाली सुनवाई

मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई 12 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत को सूचित किया गया कि विभिन्न हिंदू पक्ष आपस में इस बात को लेकर चर्चा कर रहे हैं कि विवाद से जुड़े सभी मुकदमों में से किस याचिका को मुख्य प्रतिनिधि केस माना जाए।

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षों के बीच चल रही अनौपचारिक बातचीत का संज्ञान लिया। सुनवाई की शुरुआत में ही पीठ ने हिंदू पक्षों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों—विष्णु शंकर जैन और पीवी योगेश्वरन—से पूछा कि क्या उनके बीच मामले को लेकर कोई आपसी चर्चा चल रही है।

जस्टिस कुमार ने स्पष्ट किया कि यह मामला पहले भी कई बार टाला जा चुका है, इसलिए वे इस बार केवल तभी सुनवाई स्थगित करेंगे जब पक्षों के बीच वास्तव में बातचीत हो रही हो। इस पर वकील योगेश्वरन ने अनुरोध किया कि इस आपसी बातचीत को कोर्ट के लिखित आदेश में दर्ज न किया जाए क्योंकि यह पूरी तरह अनौपचारिक है। हालांकि, जस्टिस कुमार ने कहा कि इसे आदेश में दर्ज करने में कोई नुकसान नहीं है और अदालत किसी भी पक्ष को इस बातचीत के नतीजे से बाध्य नहीं करेगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती

सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई एक हिंदू याचिकाकर्ता की उस अर्जी पर हो रही है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के 18 जुलाई 2025 के आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने अपने उस फैसले में वर्ष 2023 के मुकदमा संख्या 17 के वादी को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का आधिकारिक प्रतिनिधि मानने की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद, मुकदमा संख्या 17 को मुख्य याचिका मानकर इस पर सबसे पहले सुनवाई और फैसला होना तय हुआ था।

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याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब मथुरा की अदालत से सभी दीवानी मुकदमों को हाईकोर्ट ट्रांसफर किया गया था, तब शुरुआत में उनकी याचिका को ही मुख्य केस माना गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, हाईकोर्ट ने बाद में दूसरे पक्ष को सभी भक्तों का एकमात्र प्रतिनिधि मानकर भूल की है।

विवाद की पृष्ठभूमि और अदालती इतिहास

यह पूरा कानूनी विवाद मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटी शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने भगवान कृष्ण की जन्मस्थली पर बने मंदिर को तोड़कर इस मस्जिद का निर्माण कराया था। हिंदू पक्ष का यह भी दावा है कि मस्जिद परिसर में आज भी ऐसे कई प्रतीक मौजूद हैं जो वहां पहले मंदिर होने का संकेत देते हैं।

मथुरा की स्थानीय अदालत से हाईकोर्ट में ऐसे 20 से अधिक दीवानी मुकदमे ट्रांसफर किए जा चुके हैं, जो अब वहां लंबित हैं। हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट से अपील की है कि इस मामले की मूल सुनवाई भी बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि भूमि विवाद की तर्ज पर की जाए।

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सुप्रीम कोर्ट इस समय मस्जिद कमेटी और हिंदू पक्षों की ओर से दायर कई अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रहा है। इनमें हाईकोर्ट के 26 मई 2023 के उस आदेश को भी चुनौती दी गई है जिसके तहत मथुरा कोर्ट के सभी मामलों को हाईकोर्ट ट्रांसफर किया गया था। इससे पहले, 16 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 दिसंबर 2023 के उस निर्देश पर रोक लगा दी थी, जिसमें शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के कोर्ट-कमिशनर की निगरानी में वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मंजूरी दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पूर्व में कहा था कि इस विवाद से जुड़े सभी संवेदनशील पहलुओं की विस्तृत जांच की आवश्यकता है और दोनों पक्षों को पूरी तैयारी के साथ अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था।

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