कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को आगामी 21 जुलाई को एस्प्लेनेड स्थित विक्टोरिया हाउस के सामने ‘शहीद दिवस’ रैली करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि शहर के इस बेहद व्यस्त मध्य क्षेत्र में रैली आयोजित करने से मुख्य मार्ग चित्तरंजन एवेन्यू पर यातायात पूरी तरह से ठप हो जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह आयोजकों द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक स्थानों की समीक्षा करे।
सुनवाई के दौरान तृणमूल धड़े के वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत के समक्ष रैली के लिए कुछ वैकल्पिक स्थान प्रस्तावित किए। इनमें एस्प्लेनेड का मेट्रो चैनल या डोरिना क्रॉसिंग और दक्षिण कोलकाता में बिड़ला तारामंडल के सामने का क्षेत्र शामिल है, जो उस दिन प्रस्तावित अन्य दो रैलियों के स्थानों से लगभग दो किलोमीटर दूर है। वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि इस रैली में तकरीबन 15,000 से 20,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है।
सुरक्षा और अन्य रैलियों पर कोर्ट का रुख
यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब तृणमूल धड़े ने कोलकाता पुलिस द्वारा विक्टोरिया हाउस के आसपास के क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधात्मक आदेश को चुनौती दी। राज्य के एडवोकेट जनरल सुरोजित नाथ मित्रा ने कोर्ट के समक्ष रुख स्पष्ट किया कि पुलिस रैली के आयोजन का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि वह चाहती है कि इसे किसी अन्य स्थान पर आयोजित किया जाए।
अदालत ने पुलिस के इस तर्क पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब उसी दिन उसी क्षेत्र में दो अन्य रैलियों को अनुमति दी जा चुकी है, तो पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करके इस तीसरी रैली को भी वहां क्यों नहीं आयोजित किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि प्रशासन ने 21 जुलाई को मेयो रोड पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास तृणमूल के दूसरे धड़े की रैली और शहीद मीनार मैदान में कांग्रेस पार्टी की जनसभा को पहले ही मंजूरी दे दी है।
शहीद दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ
अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कोर्ट को बताया कि 1993 से, केवल दो या तीन अपवादों को छोड़कर, हर साल ममता बनर्जी के नेतृत्व में विक्टोरिया हाउस के सामने ही इस रैली का आयोजन किया जाता रहा है। यह वार्षिक कार्यक्रम 21 जुलाई 1993 को पुलिस की गोलीबारी में मारे गए 13 कांग्रेस कार्यकर्ताओं की याद में आयोजित किया जाता है। उस समय ममता बनर्जी युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं और तभी से इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अदालत ने इन दलीलों को सुनने के बाद सुनवाई को बुधवार दोपहर 12:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया, ताकि एडवोकेट जनरल वैकल्पिक स्थानों को लेकर सरकार की राय और पुलिस की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर सकें।

