तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक और धमकी भरी टिप्पणी करने के मामले में गिरफ्तार विलातीकुलम से डीएमके विधायक जी. वी. मारकंडन की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट अब 27 जुलाई को सुनवाई करेगा। मारकंडन ने तूतीकोरिन की मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा पारित न्यायिक रिमांड आदेश को रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
पुलिस से निर्देश लेने के लिए मांगा समय
गुरुवार को जस्टिस जी. के. इलांथिरैयन की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक आर. जॉन सत्यन ने पुलिस अधिकारियों से जरूरी निर्देश प्राप्त करने के लिए अदालत से समय देने का अनुरोध किया। इसके बाद अदालत ने मामले को 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया।
गिरफ्तारी प्रक्रिया में कानूनी उल्लंघनों का दावा
तूतीकोरिन न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए अपनी याचिका में मारकंडन ने दलील दी है कि उनकी गिरफ्तारी में mandatory कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन आरोपों के तहत उन पर मामला दर्ज किया गया है, उनमें अधिकतम सात वर्ष के कारावास का प्रावधान है।
विधायक का कहना है कि सात साल तक की सजा वाले अपराधों में पुलिस के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस) की धारा 35(3) के तहत पहले नोटिस जारी करना अनिवार्य है, लेकिन पुलिस ने उन्हें बिना कोई पूर्व नोटिस दिए ही गिरफ्तार कर लिया।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि पुलिस गिरफ्तारी से पहले बीएनएस की धारा 35(3) के तहत नोटिस देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। इन नियमों का पालन न करना गिरफ्तारी को गैर-कानूनी बनाता है और यह कानून की प्रक्रिया का सीधा दुरुपयोग है।
यह आपराधिक मामला एस. बालसुब्रमण्यम द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत के आधार पर शुरू हुआ था। शिकायत मिलने के बाद तूतीकोरिन क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज किया और 20 जुलाई 2026 को विधायक मारकंडन को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया था।

