जेएंडके बैंक के अधिकारी की बर्खास्तगी रद्द: बिना जांच सेवा समाप्त करना असाधारण कदम, हाईकोर्ट ने कहा—बैंक प्रमुख के पास राज्यपाल जैसी शक्तियां नहीं

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू एंड कश्मीर बैंक (J&K Bank) के उप महाप्रबंधक सादत पम्पोरी की बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया है। कथित देशविरोधी गतिविधियों के आरोप में बैंक प्रबंधन द्वारा की गई इस कार्रवाई को निरस्त करते हुए अदालत ने कहा कि बिना किसी जांच के किसी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त करना एक अत्यंत कठोर कदम है, जिसे केवल दुर्लभ और विशिष्ट परिस्थितियों में ही उठाया जाना चाहिए।

जस्टिस संजय धर ने शनिवार को दिए अपने 21 पन्नों के फैसले में बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश को अनुचित ठहराया।

संवैधानिक प्रमुखों और बैंक प्रबंधन के अधिकारों में स्पष्ट अंतर

अदालत ने बैंक के ऑफिसर्स सर्विस मैनुअल (OSM) के क्लॉज 12.29 के आधार पर दी गई प्रबंधन की दलीलों को खारिज कर दिया। बैंक प्रबंधन का दावा था कि उसके एमडी और सीईओ के पास संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) के तहत भारत के राष्ट्रपति या राज्यपालों जैसी ही शक्तियां हैं, जिसके तहत राज्य की सुरक्षा के हित में जांच प्रक्रिया को छोड़ा जा सकता है।

जस्टिस धर ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल को मिले अधिकारों और बैंक के सर्विस मैनुअल के क्लॉज 12.29 के तहत सीईओ को मिले अधिकारों में बुनियादी अंतर है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रमुखों के लिए किसी पूर्व जांच या किसी बाहरी प्राधिकारी की सलाह की आवश्यकता नहीं होती। इसके विपरीत, बैंक के आंतरिक नियमों के तहत किसी कर्मचारी को सीधे हटाने से पहले विधिवत जांच और देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता का स्पष्ट निष्कर्ष होना अनिवार्य है। अदालत के अनुसार, बैंक प्रबंधन इन अनिवार्य शर्तों को पूरा किए बिना ही बर्खास्तगी का आदेश जारी करने का दोषी पाया गया।

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सीआईडी की गोपनीय रिपोर्ट और सोशल मीडिया अभियान का संदर्भ

सादत पम्पोरी को जुलाई 2024 में पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) की एक गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर पद से हटाया गया था। वह रिपोर्ट संवेदनशील स्रोतों, गोपनीय पूछताछ और ‘#TortureKashmir’ हैशटैग से चलाए गए एक ऑनलाइन अभियान से जुड़ी सामग्रियों पर आधारित थी, जिसे कथित तौर पर पम्पोरी द्वारा संचालित बताया गया था।

हाईकोर्ट ने रेखांकित किया कि पम्पोरी की देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता स्थापित करने वाली किसी औपचारिक जांच के अभाव में बैंक नेतृत्व के पास इस प्रकार की सीधी बर्खास्तगी का आदेश देने का विधिक अधिकार नहीं था।

अप्रैल 2024 का निलंबन आदेश पुनः प्रभावी, बैंक के पास कार्रवाई के दो विकल्प

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हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश को रद्द करने के साथ यह भी स्पष्ट किया कि इसका अर्थ अधिकारी को सभी आरोपों से दोषमुक्त करना नहीं है। इस फैसले के बाद पम्पोरी के खिलाफ 14 अप्रैल 2024 को जारी किया गया निलंबन आदेश स्वतः बहाल हो गया है, क्योंकि उस निलंबन को अदालत में चुनौती नहीं दी गई थी।

अदालत ने बैंक प्रशासन के समक्ष आगे की कार्रवाई के लिए दो स्पष्ट विकल्प खुले रखे हैं। बैंक प्रबंधन चाहे तो सर्विस मैनुअल के क्लॉज 12.29 में उल्लिखित निर्धारित प्रक्रिया का विधिवत पालन करते हुए नया आदेश पारित कर सकता है, या फिर बहाल किए गए निलंबन आदेश के आधार पर अधिकारी के खिलाफ औपचारिक विभागीय जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है।

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