जवाई लेपर्ड क्षेत्र में 1 किमी का निर्माण-नियंत्रण दायरा लागू, राजस्थान हाईकोर्ट ने पर्यटन और अवैध गतिविधियों पर कसी नकेल

पाली जिले के बहुचर्चित जवाई लेपर्ड क्षेत्र में तेंदुओं के प्राकृतिक पर्यावास, गुफाओं और आवागमन गलियारों के संरक्षण के लिए राजस्थान हाईकोर्ट ने एक व्यापक विनियामक ढांचा लागू कर दिया है। हाईकोर्ट ने लेपर्ड के महत्वपूर्ण प्राकृतिक ठिकानों के चारों ओर एक किलोमीटर का निर्माण-नियंत्रण क्षेत्र निर्धारित करते हुए नए व्यावसायिक निर्माण, अनियंत्रित सफारी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं।

जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराणा की खंडपीठ ने शनिवार को अपूर्वा अग्रावत की जनहित याचिका पर यह अंतिम फैसला सुनाया। इसके तहत अदालत ने 23 मार्च, 20 अप्रैल और 28 अप्रैल को पारित अपने अंतरिम आदेशों को अंतिम फैसले में समाहित कर दिया है। कोर्ट ने प्रशासन को राज्य सरकार के 31 मार्च 2015 के आदेश का कड़ाई से पालन कराने का निर्देश दिया, जिसके अंतर्गत अधिसूचित जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व के एक किलोमीटर के दायरे में नए होटल, रिसॉर्ट, खनन और कृषि भूमि रूपांतरण जैसी व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह एक किलोमीटर की दूरी कोई स्थायी पारिस्थितिक सीमा नहीं है, बल्कि एक अंतरिम और साक्ष्य-आधारित विनियामक सीमा के रूप में प्रभावी रहेगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दीर्घकालिक नीति बनाने से पहले इलाके का जियो-रेफरेन्स्ड मैपिंग कराए और वहां की पारिस्थितिकी तथा वहन क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) का वैज्ञानिक आकलन करे, ताकि पूर्ण संरक्षण वाले क्षेत्रों और विनियमित गतिविधियों वाले क्षेत्रों का स्पष्ट निर्धारण हो सके।

READ ALSO  कर्नाटक हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के कई आरोपों के बीच प्रज्वल रेवन्ना की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

पहाड़ों की कटाई, खनन और अवैध निर्माण पर पूरी रोक

हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत यह पाबंदी निजी, राजस्व, पंचायती और वन भूमि—सभी पर एक समान लागू होगी। चिन्हित लेपर्ड हैबिटेट में किसी भी नए निर्माण, सड़क या ट्रैक बनाने, बाउंड्री वॉल खड़ी करने, पहाड़ियों की कटाई, खनन, ब्लास्टिंग और खुदाई पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। ऐसी किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे तेंदुओं की आवाजाही बाधित हो या उनके पर्यावास को नुकसान पहुंचे।

पूर्व में खनन पर लगाई गई रोक आगे भी प्रभावी रहेगी। इसके साथ ही नए कंटीले तार लगाने या ऐसी पक्की दीवारें खड़ी करने पर रोक लगा दी गई है जो वन्यजीवों के गलियारों को बांटती हों। अदालत ने कहा कि यदि पहले से लगी कोई बाड़ वन्यजीवों के आवागमन मार्ग में रुकावट बनती पाई जाती है, तो जमीन मालिक को नोटिस देकर उसे हटाया या संशोधित किया जा सकेगा।

ग्रामीणों और बुनियादी सुविधाओं को पाबंदियों से छूट

READ ALSO  क्या एक नाबालिग बच्चा अपना अंग बीमार पिता को दान कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट करेगा तय

अदालत ने स्थानीय आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई रियायतें भी दी हैं। गांव के मौजूदा आबादी क्षेत्र के भीतर वास्तविक आवासीय निर्माण, वैध मकानों की बिना विस्तार किए मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण पर कोई रोक नहीं होगी।

इसके अलावा स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, औषधालय और पेयजल से जुड़ी आवश्यक जनसुविधाओं के बुनियादी ढांचे को इन पाबंदियों से बाहर रखा गया है। स्थानीय ग्रामीणों की पारंपरिक खेती, पशु चराई और पारंपरिक आजीविका गतिविधियों को भी वन्यजीव-अनुकूल शर्तों के साथ सुरक्षित रखा गया है।

सफारी और रिसॉर्ट्स के लिए सख्त नियम तय

पर्यटन गतिविधियों पर लगाम कसते हुए हाईकोर्ट ने मौजूदा स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को वन, राजस्व, पंचायती और निजी सभी भूमियों पर अनिवार्य रूप से लागू रखने का निर्देश दिया। सफारी से जुड़े सभी वाहनों और ऑपरेटरों का पंजीकरण कराना जरूरी होगा और सभी गाड़ियों में जीपीएस उपकरण लगा होना अनिवार्य रहेगा।

READ ALSO  OTS योजना के तहत अग्रिम राशि जमा करने में विफलता आवेदन को अयोग्य बनाती है: सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने रात की सफारी, तेंदुओं को लुभाने के लिए चारा डालने (बेटिंग), कृत्रिम रोशनी का उपयोग करने, ड्रोन उड़ाने, निषिद्ध क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश और लेपर्ड की गुफाओं के पास गाड़ियों का जमावड़ा लगाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। वहीं, होटल और वाणिज्यिक रिसॉर्ट्स पर अपने कमरों या परिसर से तेंदुआ दिखने की गारंटी का दावा करके प्रचार करने और बुकिंग लेने पर भी रोक लगा दी गई है।

सार्वजनिक किया जाएगा मैपिंग का ब्योरा

अदालत ने आदेश दिया है कि प्रस्तावित वैज्ञानिक सर्वेक्षण में लेपर्ड की गुफाओं, मांदों, प्रजनन और विश्राम स्थलों, आवागमन गलियारों, वेटलैंड्स, जल स्रोतों, मानव बस्तियों, सड़कों और पर्यटन केंद्रों को पूरी तरह चिन्हित किया जाए। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस नक्शे को सार्वजनिक किया जाएगा और संबंधित ग्राम पंचायतों में आम जनता के देखने के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। हाईकोर्ट ने इन सभी निर्देशों के अंतर-विभागीय समन्वय और जमीनी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी पाली के जिला कलेक्टर और उप वन संरक्षक (डीसीएफ) को सौंपी है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles