दिल्ली हाईकोर्ट ने दोस्तों के बीच हुए झगड़े से जुड़े एक आपराधिक मामले को आपसी सुलह के बाद रद्द कर दिया है। राहत देने के साथ ही अदालत ने मामले से जुड़े दो व्यक्तियों को मणिपुर के एक अस्पताल में समाज सेवा करने और जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस प्रतीक जालान की पीठ ने 21 अगस्त को यह आदेश सुनाते हुए कहा कि चूंकि शिकायतकर्ता और दोनों आरोपियों के बीच अब कोई मनमुटाव नहीं है और वे दोस्त बने हुए हैं, इसलिए इस मामले में सजा होने की संभावना बेहद कम है। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसी स्थिति में कानूनी कार्यवाही को आगे बढ़ाने का कोई सार्थक औचित्य नहीं रह जाता और इससे केवल दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट ही बढ़ेगी। अदालत के अनुसार, मामले को पूरी तरह समाप्त करना ही न्याय के हित में होगा।
अस्पताल में छह सत्रों की समाज सेवा
अदालत ने याचिकाकर्ता और प्रतिवादी संख्या 4 को मणिपुर स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में दो-दो घंटे के कुल छह सत्रों में समाज सेवा करने का निर्देश दिया। दोनों को अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के समक्ष उपस्थित होना होगा, जो उन्हें उपयुक्त जिम्मेदारियां सौंपेंगे।
काम शुरू होने की तारीख से दो महीने के भीतर यह समाज सेवा पूरी करनी होगी। इसके बाद मेडिकल सुपरिंटेंडेंट द्वारा जारी किया जाने वाला प्रमाण पत्र औपचारिक तौर पर अदालत के रिकॉर्ड में जमा कराया जाएगा। इसके अलावा, अदालत ने दोनों व्यक्तियों को दो सप्ताह के भीतर दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में संयुक्त रूप से 10,000 रुपये जमा करने का भी आदेश दिया।
किराए के फ्लैट में मारपीट से जुड़ा था विवाद
यह पूरा मामला दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के डाबरी थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा था। शिकायतकर्ता के अनुसार, घटना पिछले साल मार्च महीने की है जब वह अपने एक साथी के साथ किराए के फ्लैट में रह रहा था। आरोप था कि दोनों आरोपी जबरन फ्लैट में दाखिल हुए और उनके साथ मारपीट की।
दर्ज मामले के मुताबिक, मारपीट के दौरान पीड़ित को लात-घूंसे मारे गए, जिसके चलते वह किचन के स्लैब पर जा गिरा और उसके सिर में गंभीर चोट आई।
दबाव के बिना हुआ समझौता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि घटना में किसी भी तरह के आग्नेयास्त्र या धारदार हथियार का इस्तेमाल नहीं किया गया था, न ही सिर पर चोट पहुंचाने के इरादे से कोई अलग से हमला किया गया था। यह विवाद दोस्तों के बीच हुई अचानक कहासुनी का नतीजा था।
दोनों पक्षों ने पीठ को बताया कि एफआईआर दर्ज होने के कुछ समय बाद ही उन्होंने बिना किसी डर, दबाव या प्रभाव के आपसी सहमति से समझौता पत्र तैयार कर लिया था। चोटिल व्यक्ति ने अदालत को आश्वस्त किया कि वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है और उसे चोट का कोई दीर्घकालिक असर नहीं है। दोनों पक्षों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके संबंध अब सामान्य हैं और वे एक-दूसरे के खिलाफ कोई शिकायत नहीं रखते।

