नई दिल्ली — भारतीय न्यायपालिका के लिए एक बड़े और त्वरित घटनाक्रम में, भारत के राष्ट्रपति ने सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में पांच नए जजों की नियुक्ति की है। केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 1 जून 2026 को एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इसकी आधिकारिक घोषणा की।
आधिकारिक घोषणा इसकी पुष्टि करती है कि ये नियुक्तियाँ भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत की गई हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के साथ औपचारिक परामर्श प्रक्रिया के बाद इन नामों को अंतिम रूप दिया गया।
कॉलेजियम की सिफारिश से नियुक्ति तक
यह त्वरित कार्यकारी कदम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशों के ठीक बाद आया है। कॉलेजियम ने 22 मई और 27 मई 2026 को हुई अपनी महत्वपूर्ण बैठकों के दौरान, शीर्ष अदालत में पदोन्नति के लिए इन पांच नामों का चयन किया था।
नए नियुक्त न्यायाधीशों में विभिन्न उच्च न्यायालयों के चार मौजूदा मुख्य न्यायाधीश और बार (वकील समुदाय) की एक वरिष्ठ सदस्य शामिल हैं:
- श्री न्यायमूर्ति शील नागू: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद से पदोन्नत।
- श्री न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर: बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद से पदोन्नत।
- श्री न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद से पदोन्नत।
- श्री न्यायमूर्ति अरुण पल्ली: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद से पदोन्नत।
- श्रीमती वेंकिता सुब्रमणि मोहाना: बार से सीधे नियुक्त, जहाँ वे एक वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) के रूप में कार्यरत रही हैं।
सरकारी अध्यादेश से बढ़ी कोर्ट की क्षमता
ये नियुक्तियाँ न्यायिक पेंडेंसी (लंबित मामलों) से निपटने के उद्देश्य से किए गए कानूनी बदलावों के तुरंत बाद हुई हैं। हाल ही में 16 मई 2026 को, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 प्रख्यापित किया था।
सरकार द्वारा पारित इस अध्यादेश ने आधिकारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट के स्वीकृत जजों की संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 (मुख्य न्यायाधीश सहित) कर दिया है। इसी क्षमता विस्तार ने आगामी सत्रों से पहले अदालत की ताकत बढ़ाने के लिए इन तत्काल नियुक्तियों का रास्ता साफ किया।
रिक्तियों और CJI की कतार पर प्रभाव
हालांकि पांच नए न्यायाधीशों के आने से अदालत की वर्तमान कार्यबल क्षमता 37 हो जाएगी, लेकिन आने वाले दिनों में और रिक्तियां होने वाली हैं। सुप्रीम कोर्ट इस महीने कुछ और बदलावों के लिए तैयार है, विशेष रूप से 16 जून 2026 को न्यायमूर्ति पंकज मिथल की सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के साथ न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी भी जून के अंत में रिटायर हो रहे हैं।
कोर्ट की वरिष्ठता सूची पर नजर रखने वाले कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इन पांच नए नियुक्त न्यायाधीशों में से कोई भी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की भविष्य की उत्तराधिकार रेखा (line of succession) को प्रभावित नहीं करेगा। भविष्य के CJI के लिए पहले से निर्धारित समयरेखा पूरी तरह अपरिवर्तित रहेगी, क्योंकि नए न्यायाधीश संस्थागत वरिष्ठता क्रम में नीचे के पदों पर शामिल हो रहे हैं।
अपनी घोषणा के अंत में, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने नए नियुक्त न्यायाधीशों को अपनी शुभकामनाएं दीं, जो जल्द ही देश की सर्वोच्च अदालत में पद और गोपनीयता की शपथ लेकर अपना कार्यभार संभालेंगे।

