सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 1 अप्रैल को हुई हिंसा की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को अपना काम दो महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। इस मामले में एक उग्र भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखा था।
चीफ जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि NIA को अपनी जांच पूरी करने के बाद सक्षम अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी चाहिए। सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल किया, “जांच की वर्तमान स्थिति क्या है? क्या यह पूरी हो गई है?” कोर्ट ने जोर देकर कहा कि इस मामले को उसके “तार्किक निष्कर्ष” तक ले जाना जरूरी है।
यह घटना 1 अप्रैल की है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के लिए तैनात सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घेर लिया था। इन अधिकारियों में तीन महिलाएं और एक पांच साल का बच्चा भी शामिल था। ये अधिकारी पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड से तैनात किए गए उन 700 अधिकारियों का हिस्सा थे, जो मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की 60 लाख से अधिक आपत्तियों का निपटारा कर रहे थे।
कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा लिखे गए एक पत्र के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। पत्र में बताया गया था कि किस तरह न्यायिक अधिकारियों को बिना भोजन और पानी के नौ घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर और चुनाव आयोग की शिकायत के बाद NIA ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी।
NIA की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कोर्ट को बताया कि वह इस संबंध में एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेंगे। हालांकि, कोर्ट ने जांच में तेजी लाने का निर्देश देते हुए कहा, “हमारा विचार है कि NIA जल्द से जल्द जांच पूरी करे, अधिमानतः दो महीने की अवधि के भीतर।” पीठ ने आगे टिप्पणी की, “आप अपनी चार्जशीट दाखिल करें। कानून अपना काम करेगा।”
चीफ जस्टिस ने इस घेराव के लिए गिरफ्तार किए गए लोगों की पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या पकड़े गए लोगों का कोई “राजनीतिक बैकग्राउंड” है।
सुप्रीम कोर्ट इस प्रक्रिया में लगे न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर लगातार गंभीर बना हुआ है। इससे पहले 13 अप्रैल को पीठ ने स्पष्ट किया था कि चुनावी प्रक्रिया में तैनात अधिकारियों को दी गई सुरक्षा कवर विधानसभा चुनाव संपन्न होने तक जारी रहेगी और कोर्ट की अनुमति के बिना इसे हटाया नहीं जा सकेगा।
सोमवार का यह आदेश 24 अप्रैल के उस फैसले के क्रम में आया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने NIA को जांच पूरी होने पर चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दी थी।

