आकांक्षा दुबे केस: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपियों को जारी किया नोटिस, क्या अब CBI करेगी जांच?

भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत के मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मामले के दो मुख्य आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत वर्तमान में अभिनेत्री की मां द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें 2023 की इस घटना की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए घटना की परिस्थितियों पर गहराई से गौर करने के संकेत दिए हैं।

अदालत का यह नोटिस समरजीत सिंह उर्फ समर सिंह और संजय सिंह को जारी किया गया है। यह कार्रवाई आकांक्षा की मां की उस दलील पर आधारित है, जिसमें उन्होंने स्थानीय पुलिस की शुरुआती जांच रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

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गौरतलब है कि पिछले साल वाराणसी के सारनाथ स्थित एक होटल के कमरे में आकांक्षा का शव मिला था, जिसे पुलिस ने ‘आत्महत्या’ करार दिया था। हालांकि, उनकी मां का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी। याचिका में सीधे तौर पर दोनों नामजद आरोपियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए गए हैं।

आरोपियों के साथ-साथ हाई कोर्ट ने स्थानीय पुलिस प्रशासन की जवाबदेही भी तय की है। पीठ ने सारनाथ थाने के थाना प्रभारी (SHO) को इस मामले में जवाबी हलफनामा (Counter-Affidavit) दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है।

अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं किए गए, तो थाना प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होगा।

शुक्रवार को इस मामले में फैसला आने की उम्मीद थी, लेकिन पीठ ने कार्यवाही को और विस्तार देने का निर्णय लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच पर अंतिम निर्णय लेने से पहले “कुछ बिंदुओं पर नए सिरे से सुनवाई” आवश्यक है।

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अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 मई को तय की गई है। यह तारीख तय करेगी कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की फाइल राज्य पुलिस से लेकर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी को सौंपी जाएगी या नहीं। फिलहाल, स्थानीय पुलिस और पीड़ित परिवार के दावों के बीच यह कानूनी लड़ाई एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।

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